बीमारियों का ग्रहों और किस्मत से क्या है संबंध? क्या होते हैं नुकसान

ग्रहों का व्यक्ति के जीवन पर काफी प्रभाव पड़ता है. ग्रह कई बीमारियों के लिए भी जिम्मेदार होते हैं. आइए जानते हैं किस ग्रह की वजह से कौन सी बीमारी हो सकती है और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए. उपाय- मंगलवार का उपवास रखें. चीनी खाने के बजाय गुड़ का सेवन करें. जमीन
 
बीमारियों का ग्रहों और किस्मत से क्या है संबंध? क्या होते हैं नुकसान

ग्रहों का व्यक्ति के जीवन पर काफी प्रभाव पड़ता है. ग्रह कई बीमारियों के लिए भी जिम्मेदार होते हैं. आइए जानते हैं किस ग्रह की वजह से कौन सी बीमारी हो सकती है और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए.

उपाय-

मंगलवार का उपवास रखें.

चीनी खाने के बजाय गुड़ का सेवन करें.

जमीन पर या लो फ्लोर के पलंग पर सोएं.

घड़े का जल पीना अद्भुत लाभकारी होगा.

बुध और इसकी बीमारियां-

बुध शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का स्वामी होता है.

इसके कारण इन्फेक्शन वाली बीमारियां होती हैं.

यह कान नाक गले की बीमारियों से संबंध रखता है.

इसके अलावा त्वचा के रोग भी बुध के कारण ही होते हैं.

मंगल की बीमारियां-

मंगल मुख्य रूप से रक्त का स्वामी होता है.

यह रक्त और दुर्घटना की समस्या देता है.

यह उच्च रक्तचाप और बुखार के लिए भी जिम्मेदार होता है.

यह कभी कभी त्वचा में इन्फेक्शन भी पैदा कर देता है.

चंद्रमा और इसकी बीमारियां-

चंद्रमा व्यक्ति के मन और सोच को नियंत्रित करता है.

इसके कारण व्यक्ति को मानसिक बीमारियां होती हैं.

व्यक्ति को चिंताएं परेशान करती रहती हैं.

नींद, घबराहट, बेचैनी की समस्या हो जाती है.

उपाय-

देर रात तक जागने से बचें.

पूर्णिमा या एकादशी का उपवास रखें.

शिव जी की उपासना करें.

चांदी का छल्ला या चांदी की चेन धारण करें.

शरीर में कुल मिलाकर पांच तत्व और तीन धातुएं होती हैं. ये पांचों तत्व और तीनों धातुएं 9 ग्रहों से नियंत्रित होती हैं. जब कोई तत्व या धातु कमजोर होती है,

तब शरीर में बीमारियां बढ़ जाती हैं. छोटी हो या बड़ी, हर बीमारी इन 9 ग्रहों से संबंध रखती है.

इनसे संबंधित ग्रहों को ठीक करके हम शरीर की बीमारियों को दूर कर सकते हैं.

सूर्य ग्रहों का राजा है.

हर ग्रह की शक्ति के पीछे सूर्य ही होता है.

सूर्य के कारण हड्डियों की और आंखों की समस्या होती है.

ह्रदय रोग, टीबी और पाचन तंत्र के रोग के पीछे सूर्य ही होता है.

उपाय-

प्रातः जल्दी सोकर उठें

नित्य प्रातः सूर्य को जल अर्पित करें.

भोजन में गेंहू की दलिया जरूर खाएं.

तांबे के पात्र से जल पीएं.

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