बाढ का पानी उतरते ही दिखने लगी तबाही

नेपाल से निकलकर पूर्वी चम्पारण होते हुए खगड़िया में गंगा में मिलने वाली गंडक,बूढी गंडक,बागमती और लालबकेया के साथ दर्जनो नेपाली नदियों के उफान और जलस्तर मे कमी
 
The destruction started as soon as the water of the flood descended
नेपाल से निकलकर पूर्वी चम्पारण होते हुए खगड़िया में गंगा में मिलने वाली गंडक,बूढी गंडक,बागमती और लालबकेया के साथ दर्जनो नेपाली नदियों के उफान और जलस्तर मे कमी के साथ अब बाढ़ का पानी उतरने लगा है। लेकिन बाढग्रस्त बंजरिया,सुगौली,संग्रामपुर व पताही के साथ कई प्रखंडो के गांवों में बर्बादी का मंजर साफ दिखने लगा है।
The destruction started as soon as the water of the flood descended
बाढ़ प्रभावित इन क्षेत्रों के गांवो मे सडक,पुल पुलिया के बहने साथ ही सैकड़ों की तादाद मे कच्चे मकान टूट गए हैं या जर्जर हो गये है। नदियों के कटाव से कई गांव और उपजाऊ जमीने नदी मे समाहित हो चुकी है।करीब चार माह बाद बाढ़ की तबाही से मवेशी और बच्चों के साथ पलायन कर बांध या सड़कों के किनारे जिंदगी गुजार रहे लोग अब अपने घरों की ओर लौटने तो लगे हैं लेकिन तिनका-तिनका जोड़कर बसायी गृहस्थी बिखरने का दुख और अपने घर आंगन व गांवों की तबाही देख उनका कलेजा फट रहा है।

बर्बाद जिंदगी को पटरी पर लाने की चिंताएं भी सता रही हैं। घरों में भरे कीचड़ उसमें से निकलने वाले बदबू और महामारी की आशंकाओं के बीच जीवन जीने को अभिशप्त लोगो पर आश्विन माह तपती धूप भारी पड़ती दिख रही है। बाढ़ के मे डूबें हैंडपंपों से निकलते दूषित पानी से अपनी हलक बुझाने को मजबूर है जिंदगी।

खेतों में फसलों का अवशेष समाप्त हो चुका है। धान-मक्का को छोड़िए इस बार तो गन्ना भी गल गया। पानी के साथ बह कर आई मिट्टी की परतों और बालू से लगता है कोई रेगिस्तान है।नेपाल की ओर से बहकर आयी कचरे और प्लास्टिक के अवशेष कही कही छोटी पहाडी सा स्वरूप मे दिख रही है। तेज बहाव वाले क्षेत्र में तो खेतों का मेड़ का फर्क मिट सा गया है। ऊपरी इलाकों से पानी सरक कर निचले इलाकों मे सिमट गया है। जिससे आगे रबी की खेती स-समय हो पायेगा इसकी शंकाएं गांव वालों के मन को सशंकित कर रही है। पिछले चार माह में चार से पांच दफे आयी बाढ़ के कारण हरे चारे के निवाले से दूर दुधारू पशुओं को अभी और इंतजार करना पडे़गा। ऐसे तो ये नियति हर साल की है लेकिन इस साल ने तो कुछ ज्यादा तबाही किया है। बंजरिया प्रखंड क्षेत्र के कई किसानों ने कहा कि हमलोग हर साल इससे जूझते है लेकिन इस साल कुछ ज्यादा ही परेशानी लाया है। जो बरसो बरसो तक याद रहेगा।

From Around the web