दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए काशी में खुली स्पोर्ट एकेडमी, उद्घाटन 06 को

 
Sports Academy opened in Kashi for disabled players inaugurated on 06
वाराणसी,05 अक्टूबर धर्म नगरी काशी में दिव्यांग खिलाड़ियों के खेल सुविधा को बढ़ावा देने तथा पेरिस में होने वाले 2024 के ओलंपिक में काशी की भागीदारी को लेकर बड़ी पहल हुई है। भेलूपुर स्थित सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज परिसर में संत चिंतामणि दिव्यांग स्पोर्ट एकेडमी की स्थापना की गई है। इसका शुभारंभ 06 अक्टूबर को सायंकाल 4 बजे अंतरराष्ट्रीय एथलीट और पैरा ओलंपिक भारत की अध्यक्ष पद्मश्री दीपा मलिक करेगी।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री अनिल राजभर करेंगे। पुष्पा खन्ना मेमोरियल निरोग ग्राम ट्रस्ट के सौजन्य से संचालित एकेडमी के काशी संयोजक डॉ उत्तम ओझा ने बताया कि दिव्यांग खिलाड़ियों को खेलने में काफी असुविधा होती थी, उनके पास कोई स्थान नहीं था, उनकी प्रतिभा के विकास के लिए सामान अवसर नहीं मिल पाते थे। अब एकेडमी के प्रारंभ होने से खिलाड़ियों को समान अवसर मिलेंगे तथा उनकी प्रतिभा निखर कर सामने आएगी।

ओझा ने कहा कि अभी हमने टोक्यो ओलंपिक में देखा कि हमारे सामान्य खिलाड़ियों से कहीं बेहतर प्रदर्शन दिव्यांग खिलाड़ियों ने किया है। इस उम्मीद के साथ हम सब चाहते हैं कि 2024 पेरिस ओलंपिक में भारत के साथ-साथ काशी का भी प्रतिनिधित्व हो।

उत्तम ओझा ने बताया कि एकेडमी की सारी तैयारी पूरी हो चुकी है। यह अपने तरह की एक अलग दिव्यांग सपोर्ट होंगी। जहां सभी प्रकार के खेल शारीरिक, मानसिक रूप से से दिव्यांग एवं मूक,बधिर तथा व्हीलचेयर क्रिकेट दिव्यांग क्रिकेट सहित सभी प्रकार के खेलों का समावेश होगा। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में व्हीलचेयर तीरंदाजी, व्हीलचेयर बॉक्सिंग, सिटिंग बोलीबाल जैवलिन थ्रो, डिस्कस थ्रो शॉट पुट के खेल आयोजित किए जाएंगे।

निरोग ग्राम के सचिव डॉ नीरज खन्ना ने बताया कि दिव्यांगजनों के लिए दो प्रकार के खेल होते हैं- स्पेशल ओलंपिक एवं पैरा ओलंपिक। मानसिक दिव्यांगजनों के लिए स्पेशल ओलंपिक है और शारीरिक दिव्यांगजनों के लिए पैरालंपिक। यहां दोनों प्रकार के खिलाड़ियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

मनोवैज्ञानिक डॉ तुलसीदास ने बताया कि दिव्यांगजनों के विकास में खेल की महत्वपूर्ण भूमिका है। अगर हम दिव्यांगजनों को खेल के साथ जोड़ दे ,तो उनका शारीरिक के साथ-साथ मानसिक विकास भी होगा। वे समाज में सम्मान के पात्र बनते हैं और परिवार पर बोझ नहीं रहते। इसलिए अभिभावकों से अपील है कि जिनके बच्चे दिव्यांग हैं वे अधिक से अधिक संख्या में मैदान में आयें।
 

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