आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने डॉ.संजीव कुमार की पुस्तक का किया विमोचन

 
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 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने मंगलवार को पटना के बीआईए हॉल में डॉ. संजीव कुमार, सहायक प्राध्यापक, रायगंज विश्वविद्यालय, प. बंगाल द्वारा लिखित Locational Conflicts in Patna : A Study in Urban Political Geography पुस्तक का विमोचन किया ।

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इस मौके पर सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि बिहार मेरी कर्मभूमि रही है। यहां मैंने अपने प्रचारक जीवन का सालों संगठन के कार्यों में लगाया है। इस पुस्तक में डॉ.संजीव ने जिन बातों को उल्लेख किया है, वह सच्चाई से अवगत कराता है।यह पुस्तक विकास से जुड़े स्थानीय विवादों का अध्ययन है। विकास आवश्यक है परन्तु विकास विवाद को भी जन्म देती है। पुस्तक पटना के विकास और उसके कारण हुए विवादों का विस्तृत अध्ययन करती है। कई स्थानों पर समुचित विकास के अभाव ने भी विवाद को जन्म दिया है। इस पुस्तक में उसका भी वर्णन है।



उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 से 2014 तक अंग्रेजी दैनिक हिन्दुस्तान टाईम्स के पटना संस्करण में इस विषय पर प्रकाशित समाचार का विश्लेषण किया गया। इस विश्लेषण से 10-12 बिन्दु उभर कर सामने आये। पटना के बिजली संकट, नल में जल का अभाव, ठोस कचरा प्रबंधन, सीवेज समस्या, जल-जमाव, सड़क अतिक्रमण, ट्रैफिक समस्या इत्यादि का अध्ययन किया गया है।



दत्तात्रेय ने कहा कि सरकार बदलने के साथ समस्याओं का स्वरूप भी बदलता है। वर्ष 2000 से 2005 तक राज्य में राष्ट्रीय जनता दल की सरकार थी। उस समय पानी व बिजली की समस्या को पटनावासी प्रतिदिन झेलते थे। पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी। सरकार के खाली पड़े मैदान पर आवारा पशुओं का अवैध कब्जा था साथ ही असभ्य लोगों का अड्डा था।

2005 के बाद राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार बनी। सरकार बदलने के साथ दूसरी समस्या सामने आयी। राजग सरकार के समय पटना में ट्रैफिक एवं सड़क की समस्या बढ़ी। पटना में कोड वायंलेंस के केस भी बढ़े हैं। हालांकि इसे सकारात्मक रूप में लेने की आवश्यकता है। क्योंकि, पहले लोगों को मालूम ही नहीं था कि बिल्डिंग बाय-लॉज क्या है? अव्यवस्थित पटना को व्यवस्थित करने के क्रम में भी कई विवाद देखने को मिले हैं।



सरकार्यवाह होसबाले ने कहा कि प्रत्येक समस्या विवाद को जन्म नहीं देती। विवाद के मूल में मुहल्ले में रहनेवाले लोगों की मानसिकता तथा आर्थिक व सामाजिक पृष्ठभूमि भी काफी महत्वपूर्ण होती है। उदाहरण के तौर पर पाटलिपुत्र मुहल्ले में प्रायः जल जमाव की समस्या देखी जाती है लेकिन इसके कारण कोई विवाद नहीं होता।पुस्तक के लेखक बचपन से पटना में रहे हैं। वे पटना के विकास और उससे जुड़े विवाद के स्वयं साक्षी रहे हैं। बचपन से ही उन्हें यह समस्या बार-बार उलझाती रही। पटना विश्वविद्यालय में स्नातक व स्नातकोत्तर करने के क्रम में ही उन्होंने इस विषय पर शोध करने का निश्चय कर लिया था। यह पुस्तक इस विषय पर उनका शोध पत्र है।

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