पूसा ने विकसित की सरसों की नई किस्म, खाने वालों को नहीं होगा हृदय रोग का खतरा

 
Pusa has developed a new variety of mustard, the eaters will not be at risk of heart disease
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) पूसा ने सरसों की एक ऐसी किस्म विकसित की है, जिससे निकलने वाले तेल खाने से ह्रदय रोग का खतरा बेहद कम होगा। पूसा मस्टर्ड 0033 किस्म से किसानों की आय भी बढ़ेगी। इस किस्म को हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जारी किया था।
Pusa has developed a new variety of mustard, the eaters will not be at risk of heart disease
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. ए के सिंह ने ‘हिन्दुस्थान समाचार’ से खास बातचीत में बताया कि सरसों में आमतौर पर इरुसिक एसिड 45 प्रतिशत तक होता है, यह फैटी एसिड ह्रदय के लिए खतरनाक होता है। इससे हार्ट अटैक की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। लेकिन पूसा ने सरसों की एक ऐसी किस्म विकसित की है जिसमें इरुसिक एसिड 2 प्रतिशत से भी कम है। इसे खाने वालों की सेहत अच्छी रहेगी। भारत सरकार ने इसे अधिसूचित कर दिया है। अगले साल से किसानों के लिए बीज उपलब्ध हो जाएगा।



उन्होंने बताया कि इस किस्म से किसानों की आय भी दोगुनी हो जाएगी। सामान्य सरसों की प्रति ग्राम खली में ग्लूकोसिनोलेट की मात्रा 120 माइक्रोमोल होती है। जबकि पूसा- 33 में इसकी मात्रा 30 माइक्रोमोल से कम है। ग्लूकोसिनोलेट एक सल्फर कंपाउंड होता है इसलिए इसका इस्तेमाल उन पशुओं के भोजन के रूप में नहीं किया जाता जो जुगाली नहीं करते, क्योंकि इससे उनके अंदर घेंघा रोग हो जाता है। इस किस्म से निकलने वाले खली को पॉलट्री फार्म में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।



डॉ. एके सिंह ने बताया कि देश में मौजूदा समय में खाद्य तेलों के आयात पर सालाना करीब 70 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। नई किस्म से किसानों का उत्पादन बढ़ने से आयात में कमी आएगी और तेल भी सस्ता मिलेगा। पूसा 0033 किस्म से देश के लोगों की सेहत ठीक रहेगी और किसानों की आय भी दोगुणी हो जाएगी।
 

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