गरमाया मंडोला विहार किसान आंदोलन, गड्ढों में लेटे किसानों ने खुद पर डाले कफन

 
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-जिंदा समाधि की कोशिश कर रहे किसानों को हटाने गई पुलिस फोर्स वापस लौटी

गाजियाबाद,19 सितंबर । जिले के मंडोला विहार में पिछले पांच साल से चल रहा किसान आंदोलन शनिवार की आधी रात से गरमा गया है। धरना खत्म कराने मौके पर पहुंचे पुलिस बल को भी वहां से वापस लौटना पड़ा।

आवास-विकास परिषद की मंडोला विहार योजना में अधिग्रहित भूमि का उचित मुआवजा एवं अन्य मांगों को लेकर पिछले चार दिनों से जिंदा समाधि लेने बैठे 17 आंदोलनकारी किसानों को हटाने के लिए शनिवार की आधी रात में भारी संख्या में पुलिस फोर्स जेसीबी लेकर आंदोलन स्थल पर पहुंची। पुलिस फोर्स ने जेसीबी से गड्ढे भरने शुरू कर दिए,लेकिन किसान दबाव में नहीं आये तथा वे गड्ढों से बाहर नही निकले तथा अपने ऊपर सफेद कपड़ा (कफन) डाल लिया। उसके बाद पुलिस फोर्स को वापस लौटना पड़ा। आंदोलनकारी किसानों की अगुआई कर रहे किसान नेता नीरज त्यागी का आरोप है कि जिला प्रशासन की ओर से सत्याग्रही किसानों को जिंदा दफन करने का प्रयास किया गय। लेकिन वे डरने वाले नही हैं।

आवास-विकास परिषद की मंडोला विहार योजना में अधिग्रहित भूमि का उचित मुआवजा व अन्य मांगों को लेकर पिछले करीब पांच सालों से मंडोला समेत छह गांव के किसान आंदोलन कर रहे हैं। किसानों ने इसे किसान सत्याग्रह आंदोलन का नाम दिया है।

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आमरण अनशन एवं जिंदा समाधि में 17 किसान जमीन में गढ्ढे खोदकर बैठे हैं । किसान नेता मनवीर तेवतिया,मास्टर महेंद्र सिंह,रामेश्वर दयाल त्यागी,नीरज त्यागी,रामनरेश,अमित त्यागी,ब्रजेश त्यागी,योगेश त्यागी,शिवकुमार त्यागी,हरिराम त्यागी भी इन किसानों में शामिल हैं। शनिवार को सत्याग्रही किसानों ने कुछ और गढ्ढे खुदवाए थे । नीरज त्यागी ने बताया कि रात में दो बजे भारी पुलिस बल के साथ प्रशासनिक अधिकारी किसानों के खुदवाए गए गढ्ढों को जेसीबी मशीनों से भरना शुरू किया तो आमरण अनशन एवं जिंदा समाधि में बैठे किसानों ने उसका विरोध किया । विरोध स्वरूप किसान गढ्ढों मे लेट गए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने मिट्टी डालकर गढ्ढे में दबने के लिए किसानों को मजबूर किया। हालांकि बाद में अधिकारियों को पीछे हटना पड़ा।

उन्होंने कहा कि इसके बाद जिंदा समाधि लिए सभी सत्याग्रही किसानों ने अपने ऊपर सफेद कपड़ा डालकर जीवित रूप में ही कफन पहनने की रस्म अदायगी कर ली। किसानों का कहना है कि अब वे अपने प्राण निकलने का इंतजारर कर रहे हैं। वे किसी भी सूरत में प्रशासन के दमनात्मक रवैय्ये के सामने नही झुकेंगे।

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