अनूपपुर: डेंगू से मुकाबले की तैयारी अधूरी, जिले के अस्पतालों में नहीं एलाइजा टेस्ट की सुविधा

अनूपपुर जिले के दो व्यक्तियों को डेंगू पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी आगामी खतरे से निपटने विभाग की तैयारी अधूरी नजर आ रही है। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर डेंगू की जांच के लिए एलाइजा टेस्ट की सुविधा नहीं है। जिसके कारण डेूंग बुखार से प्रभावित मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। इस दौरान प्रभावित मरीजों को अपने इलाज या टेस्ट के लिए निजी लैब या जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ रही है।

 
The race for the district hospital to investigate dengue
सीएचसी में डेंगू मरीजों के सीबीसी कलेक्शन का काम भी नहीं हुआ आरम्भ, अब तक दो मरीज
 


अनूपपुर, 2 अक्टूबर। अनूपपुर जिले के दो व्यक्तियों को डेंगू पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी आगामी खतरे से निपटने विभाग की तैयारी अधूरी नजर आ रही है। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर डेंगू की जांच के लिए एलाइजा टेस्ट की सुविधा नहीं है। जिसके कारण डेूंग बुखार से प्रभावित मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। इस दौरान प्रभावित मरीजों को अपने इलाज या टेस्ट के लिए निजी लैब या जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ रही है।

डेंगू की जांच के लिए जहां सूदुर ग्रामीण अंचलों से आने वाले मरीजों को दिनभर का समय व्यतीत करना पड़ता है, वहीं निजी लैब में जांच के दौरान मोटी रकम भी अदा करनी पड़ती है। स्वास्थ्य विभाग की जानकारी के अनुसार जिले में एलाइजा टेस्ट जिला चिकित्सालय में ही की जाती है। सीएचसी स्तर पर शासन के निर्देश के तहत सीबीसी जांच के दौरान आने वाले मरीजों में डेंगू की पुष्टि होने पर उसके सैंपल कलेक्शन किए जाने के आदेश हैं। वहीं शासकीय प्रावधानों में एलाइजा मशीन को जिला अस्पताल में ही रखने के निर्देश हैं।

सीएचसी सेंटर या पीएचसी सेंटर पर इस महंगी मशीनरी का मेंटनेंस नहीं होने और प्रशिक्षित तकनीशियन की अनुपलब्धता में खराब होने की आशंका अधिक बनी रहती है। जिसके कारण अनूपपुर में मात्र जिला अस्पताल में ही एलाइजा से जांच की सुविधा है। जबकि जिले में जिला अस्पताल सहित 8 सीएचसी और 18 पीएचसी सेंटर हैं। लेकिन इन सेंटरों पर मशीन की सुविधा नहीं होने पर सीबीसी मशीन से जांच में प्लेटलेट कम सामने आने पर इसे डेंगू मानकर अंदाज से उपचार किया जाता है। लेकिन अधिकांश मरीज ऐसे भी जिनके पास डेंगू होने की पुष्टि नहीं है, लेकिन डेंगू का इलाज करा रहे हैं।

अब तक जिले में दो लोग संक्रमित

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में अब तक दो लोगों की रिपोर्ट डेंगू पॉजिटिव आई है। ये दोनों रिपोर्ट सितम्बर माह के दौरान सामने आए हैं। लेकिन ये दोनों मरीजों के बीमार होने पर अन्य स्थानों पर जांच के दौरान पॉजिटिव पाई गई है। इनमें एक बिलासपुर(छग) और दूसरा शहडोल में जांच के दौरान पॉजिटिव पाए गए हैं। वहीं पिछले 9 माह के दौरान डेंगू सम्बंधित सर्वेक्षण के लिए चलाए गए कार्य में जिले के 728 गांवों में से 144 गांवों का जांच परीक्षण किया गया। जिसम े22838 घरों से 1118 डेंगू के लार्वा को पाते हुए उसे नष्ट करने की कार्रवाई की थी।

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बिना एलाइजा जांच की कैसे होगी पुष्टि

चिकित्सकों के अनुसार जब तक एलाइजा टेस्ट से पीडि़त व्यक्ति के संक्रमण को डेंगू नहीं माना जाता, तब तक उसकी रिपोर्ट भी स्पष्ट नहीं मानी जाती। एलाइजा टेस्ट की रिपोर्ट देरी से आती है, इसलिए तत्काल के लिए कार्ड से रेपिड एंटीजन टेस्ट किया जाता है, लेकिन पुष्टि के लिए एलाइजा टेस्ट किया जाता है। लेकिन यह सुविधा जिला अस्पताल के अलावा अन्य किसी सेंटर पर उपलब्ध नहीं है। जबकि गांवों में मरीजों की सीबीसी जांच में प्लेटलेट कम आती है तो उसे डेंगू मानकर इलाज आरम्भ कर दिया जाता है। एलाइजा टेस्ट से खून में एंटीबॉडीज और एंटीजन होने का पता लगाया जाता है। यदि किसी को संक्रमण हो गया है तो उसके खिलाफ शरीर एंटीबॉडीज बना रहा है या नहीं टेस्ट से पता लगता है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एससी राय का कहना है कि शासन स्तर पर एक ही मशीन जिला चिकित्सालय के लिए उपलब्ध कराई गई है। इस मशीन से एक बार 80 जांच की जा सकती है, जबकि किसी प्राथमिक या सीएचसी सेंटर पर इतनी संख्या में टेस्ट नहीं आते। सुरक्षा कारणों व अधिक संख्या में जांच के लिए जिला चिकित्सालय में ही इसकी सुविधा बनाई गई है।

 

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