" राम " को जन-जन के राम बनाने में तपोभूमि चित्रकूट का अहम योगदान : जगद्गुरु रामभद्राचार्य

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग तथा संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में अयोध्या शोध संस्थान लखनऊ द्वारा जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के अष्टावक्र सभागार में वनवासी
 
Important contribution of Tapobhoomi Chitrakoot in making Ra

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग तथा संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में अयोध्या शोध संस्थान लखनऊ द्वारा जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के अष्टावक्र सभागार में वनवासी राम की थीम पर आयोजित दो दिवसीय रामायण कान्क्लेव 2021 का भव्य शुभारंभ पद्मविभूषण से अलंकृत जगद्गुरु रामभद्राचाचार्य महाराज ने किया।

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उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कर रहे पद्मा विभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी ने चित्रकूट के लिए शासन द्वारा निर्धारित विषय "वनवासी राम" विषय पर अत्यंत सारगर्भित उद्बोधन देते हुए लोगों को राम के महत्व से परिचित कराया। जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि वनवासी राम की थीम पर चित्रकूट में दिव्य समारोह का आयोजन हो रहा है।

कहा कि इस भव्य आयोजन के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चित्रकूट के दिव्यांग विश्वविद्यालय को चुना है। चित्रकूट ही वह पावन धरा है। जहां प्रभु श्रीराम ने अपने 14 वर्ष के वनवास में से 12 वर्ष व्यतीत किये थे। चित्रकूट से ही वनवासी राम जन-जन के राम बने हैं। राम शब्द की महिमा का बखान करते हुए जगद्गुरु ने कहा कि जिससे सम्पूर्ण राष्ट्र का मंगल हो वह राम है। वनवासी राम के चित्रकूट में 12 वर्षों तक चित्रकूट में व्यतीत करने की वहज से ही अत्रि ऋषि ने 12 छंदो में प्रभु श्रीराम की स्तुति की है। जगद्गुरु ने कहा कि दुनिया में तीर्थ तो बहुत है, लेकिन चित्रकूट जैसा पावन तीर्थ दूसरा कोई नहीं है। यहां वनवासी के रूप में प्रभु श्रीराम आज भी विराजमान है।

जगद्गुरु ने कहा कि अयोध्या-संस्कारों, मिथिला श्रृंगार, लंका -संहार और चित्रकूट प्रभु श्रीराम की विहार की भूमि है। कहा कि जब राम जी को अयोध्या ने निकाला था तब चित्रकूट ने ही शरण दिया था। जगद्गुरु ने कहा कि राम-भरत के मिलन से चित्रकूट के शिलायें मोम बनकर पिघल गई थी। कामदगिरि परिक्रमा में आज भी भरत मिलाप के नाम से वह स्थान मौजूद है। वनवासी राम की महिमा का बखान करते हुए जगद्गुरु ने कहा कि जटायु रूपी पक्षी को पिता मानकर अंतिम संस्कार करने वाला सिर्फ वनवासी राम का ही व्यक्तित्व हो सकता है। बताया कि वनवास में राम को चारों फलों की प्राप्ति हुई थी। उन्होंने कहा कि भक्त को मोक्ष्य के लिए भगवान के दर्शन की जरूरत होती है। वही भगवान को मोक्ष्य के लिए भक्तों के दर्शन की जरूरत होती है। चित्रकूट में भगवान राम को मुनि और गण दोनों के दर्शन हुए थे।

कार्यक्रम में जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने कहा कि शासन के निर्देश पर पर्यटन और संस्कृति विभाग द्वारा जन जन के राम की थीम पर रामायण कॉन्क्लेव का आयोजन हो रहा है। उन्होंने कहा कि दो दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में भगवान श्रीराम के विविध स्वरूपों का चित्रण किया जायेगा। साथ ही व्याख्यान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा।

कार्यक्रम के संयोजक अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ लवकुश द्विवेदी ने बताया कि जन-जन के राम की थीम पर उत्तर प्रदेश के 17 शहरों में उत्तर प्रदेश पर्यटन और संस्कृति विभाग द्वारा रामायण कॉन्क्लेव कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। चित्रकूट में वनवासी राम की टीम पर आयोजित कॉन्क्लेव का शुभारम्भ पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज द्वारा किया गया है। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन और राम की शक्ति नृत्य नाटिका का मंचन समेत विविध कार्यक्रम आयोजित होंगे।

कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृत संस्थान नई दिल्ली के कुलपति डी सुब्बा राव एवं जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 योगेश चंद्र दुबे ,सांसद आर के पटेल, विधायक आनंद शुक्ला, एडीजी स्टाम्प पी सी श्रीवास्तव,रमापति मिश्रा आदि मंच पर उपस्थित रहें। उद्घाटन सत्र वैचारिक सत्र के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। जिनमें अवधेश द्विवेदी का पखवाज वादन, धर्मनाथ मिश्र लखनऊ का गायन, मनोज गुप्ता प्रयागराज, राम बहुरी चित्रकूट, चंद्रपाल का दिवारी नृत्य, गजाधर जी का आदिवासी नृत्य और डॉक्टर योगेश शुक्ला वाराणसी के द्वारा राम की शक्ति पूजा के लघु नाटिका की मनमोहक प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन व संपादन डॉक्टर गोपाल कुमार मिश्र ने किया।

इसी कार्यक्रम के अंतर्गत संस्कृति विभाग की ओर से उत्तर प्रदेश संगीत नाटक एकेडमी ने पहली बार श्री राम चरितमानस गायन एवं श्री रामचरितमानस प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन चित्रकूट में किया। यह आयोजन भी जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के सूरदास सभागार में हुआ। इस प्रतियोगिता के अंतर्गत कुमारी प्रतीक्षा मिश्रा ने रामचरितमानस गायन एवं प्रश्नोत्तरी दोनों ही प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कश्मीर का बिछड़ा भाग भी जल्द ले लिया जाएगा

कार्यक्रम के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कोरोना संकट काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल प्रबंधन की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि यदि नरेंद्र मोदी के अलावा देश में कोई दूसरा प्रधानमंत्री होता तो कोरोना महामारी के प्रकोप से करोड़ों लोगों की मौत हो चुकी होती। जगद्गुरु ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। धारा 370 हटा कर मोदी सरकार ने ऐतिहासिक कार्य किया है। जल्द ही कश्मीर का बिछड़ा हुआ भाग है वह भी ले लेंगे।

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