आयुर्वेद में पंचकर्म चिकित्सा से शरीर के विषाक्त तत्व बाहर : डॉ तोमर

 
Panchakarma therapy in Ayurveda removes toxic elements from the body Dr Tomar

विश्व गठिया दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन

प्रयागराज, 13 अक्टूबर किसी भी बीमारी में आगे के नुकसान को रोकने के लिए यदि शुरुआत में ही उपचार नहीं किया जाता तो दैनिक गतिविधियां एवं शारीरिक क्षमता प्रभावित होती है। हमारी अव्यवस्थित जीवन शैली, गलत आहार, सेडेन्टरी लाइफ स्टाइल, मोटापा गठिया के प्रमुख कारण हैं। जोड़ों के दर्द में आयुर्वेद में वर्णित पंचकर्म चिकित्सा प्रभावी है। जिसमें शरीर के विषाक्त तत्वों को बाहर निकाल दिया जाता है। एक्सरसाइज एवं कैल्शियम युक्त डाइट से इन बीमारियों से लम्बे समय तक बचा जा सकता है।

यह बातें विश्व आयुर्वेद मिशन के अध्यक्ष डॉ जी.एस तोमर ने विश्व आयुर्वेद मिशन द्वारा आयोजित ऑनलाइन स्वास्थ्य संगोष्ठी में बुधवार को कही। उन्होंने बताया कि कई शोध द्वारा हैवी मेटल से बने योग का सकारात्मक प्रभाव जोड़ों के दर्द में देखा गया है। इन रस औषधियों का किडनी एवं लिवर पर कोई भी दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है।

मीरजापुर के वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ एस.एन पाठक ने कहा कि विटामिन डी एवं बी12 की कमी भी इस बीमारी का कारण है। पुरुषों से अधिक महिलाएं जोड़ों के दर्द से परेशान हैं। आज कई प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होने से रसोई से लेकर घर के सारे काम करने में शरीर को आराम तो मिलता है पर ये आराम हमारे शरीर और हड्डियों के जोड़ पर बुरा प्रभाव डाल रहा है। पहले घरों में मसालों की पिसाई से लेकर सारे काम महिलाएं स्वयं करती थी, जिससे उनके शरीर का व्यायाम भी हो जाता था।

वरिष्ठ ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ आर.के सिंह ने कहा कि दर्द की समस्या होने पर व्यक्ति मेडिकल स्टोर से पेन किलर और स्टेरॉयड लेकर खा रहे हैं जो आगे चलकर शरीर की इम्म्युनिटी को कम करने के साथ-साथ किडनी और लिवर के लिए भी घातक है। उन्होंने कहा योग प्राणायाम को अपने जीवन का नियमित हिस्सा बनाकर इन बीमारियों को कम किया जा सकता है।

डॉ जी.पी शुक्ल ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों के बीच कार्टिलेज समाप्त होने से अक्सर दर्द से परेशानी होती है। रयूमेटाइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून समस्या है। यहां इम्युन को कम करने की दवाएं देने से अन्य बीमारियों की सम्भावना बनी रहती है। वरिष्ठ अर्थोस्कोपिक एवं स्पोर्ट इंजरी एक्सपर्ट डॉ निमिश अग्रवाल ने बताया कि आज भ्रामक विज्ञापनों की वजह से जनमानस के सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने गठिया एवं अन्य बीमारी में आयुर्वेदिक औषधियों के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा कि फार्मा कम्पनियों को इन दवाओं की गुणवत्ता को बनाये रखने के लिए इनके निर्माण प्रक्रिया पर ध्यान देना होगा।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे चिकित्साधिकारी एवं विश्व आयुर्वेद मिशन के प्रदेश सचिव डॉ. अवनीश पाण्डेय ने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली के विकल्पों को अपना कर हम अपने स्वास्थ्य में सुधार करें। अपनी प्रकृति एवं स्थिति के अनुसार उपयुक्त व्यायाम के प्रकार के बारे में जानकारी के लिए चिकित्सक या फीजियोथेरेपिस्ट से परामर्श अवश्य लें।
 

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