बिहार के लोगों की खुशहाली और समृद्धि के लिए जनोन्मुखी बनें बैंक : उपमुख्यमंत्री

 
Be a people oriented bank for the happiness and prosperity
-तारकिशोर प्रसाद की अध्यक्षता में आयोजित हुई राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक

-वित्तीय वर्ष के शेष बचे महीनों में बैंकों द्वारा बेहतर प्रदर्शन के कड़े निर्देश

पटना, 16 सितम्बर (हि.स.)। बिहार के उपमुख्यमंत्री-सह-वित्त मंत्री तारकिशोर प्रसाद की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक को सम्बोधित करते हुए तारकिशोर ने कहा कि बिहार के लोगों की खुशहाली और समृद्धि के लिए बैंक जनोन्मुखी बनें।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2021-22 में राज्य के बैंकों को 1.615 लाख करोड़ का वार्षिक साख योजना का लक्ष्य दिया गया था, जिसके विरुद्ध पहली तिमाही में लगभग 29,866 करोड़ रुपये का साख वितरित किया गया है, जो लक्ष्य का मात्र 18.5 प्रतिशत ही है। इस अवधि में अधिकांश समय लॉकडाउन रहने के बावजूद बैंकों ने पिछले जून 2020 तिमाही में हासिल 23,545 करोड़ रुपये की तुलना में 6,321 करोड़ ज्यादा साख इस तिमाही में वितरित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय साख-जमा अनुपात 75 प्रतिशत के आसपास है, जबकि राज्य का साख-जमा अनुपात इस तिमाही में 45.68 प्रतिशत रहा है। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ज्यादा-से-ज्यादा जरूरतमंदों को शीघ्र ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इससे साख-जमा अनुपात में भी सुधार होगा और एसीपी लक्ष्य को भी हासिल किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि 2005 से लगातार राज्य सरकार ने बिहार में आधारभूत संरचनाओं का विकास किया है। बिहार में सड़क संपर्कता, बिजली की व्यवस्था, विधि-व्यवस्था की स्थिति बेहतर हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य में वित्तीय समावेशन के लिए काम करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। राज्य के छोटे व्यवसायियों, लघु उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, महिलाओं आदि को यदि सहज ऋण के माध्यम से बैंकिंग सुविधाएं मुहैया कराई जाएं, तो राज्य के विकास में काफी योगदान हो सकता है।

उन्होंने कहा कि कोरोना की वैश्विक चुनौती से जूझते हुए देश की आर्थिक परिस्थितियां धीरे-धीरे बदल रही हैं। बिहार में हमने 20 लाख से अधिक रोजगार सृजन का वायदा किया है और इस सपने को साकार करने में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आज डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में मुहैया कराया जा रहा है। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि बैंक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में अपनी कार्यप्रणाली को जनोन्मुखी बनाते हुए बेहतर रूप से परफॉर्म करें।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यदि राज्य में एक उद्योग लगता है, तो उससे 100 से लेकर 1000 लोगों को रोजगार की संभावनाएं बनती हैं। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में खासतौर पर पशुपालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन इत्यादि क्षेत्रों में बेहतर काम करने की संभावनाएं हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों की समृद्धि में इन आजीविकाओं की बड़ी भूमिका है। बैंक इन योजनाओं के क्रियान्वयन में लोगों को लाभान्वित करें।

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने राज्य में औद्योगिक निवेश को बढ़ाने के लिए नीतियां बनायी हैं। निवेशकों के हितों को ध्यान में रखकर नीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। ऐसी स्थिति में बैंकों का सकारात्मक प्रयास काफी महत्वपूर्ण है। अक्सर देखा जा रहा है कि छोटे-छोटे व्यवसायियों को बैंक खाता खोलने में बैंकों द्वारा जीएसटीएन नंबर की मांग की जाती है, जो खेदजनक है। उन्होंने कहा कि 40 लाख से नीचे के कारोबार पर जीएसटीएन की कोई जरूरत नहीं है। इस संबंध में जीएसटी काउंसिल द्वारा भी स्पष्ट मार्गनिर्देश जारी किए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि विभिन्न योजनाओं में आवेदन की स्थिति की निगरानी के लिए वित्त विभाग एवं राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के द्वारा एक पोर्टल की लॉन्चिंग आज के कार्यक्रम में की गई। इससे विभिन्न योजनाओं यथा: किसान क्रेडिट कार्ड, मुद्रा योजना, पीएमईजीपी एवं विभागों की अन्य योजनाओं में आवेदनों की प्रगति के संबंध में संबंधित विभाग और बैंकों के द्वारा बेहतर ढंग से समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।

वहीं, उद्योग मंत्री मोहम्मद शाहनवाज हुसैन ने कहा कि बैंक योजनाओं के क्रियान्वयन में राज्य की जनता के हितों को ध्यान में रखकर अपना निगाह बदलें। बिहार में इथेनॉल प्रोजेक्ट के तहत कई बड़ी परियोजनाओं पर काम शुरू हो रहे हैं। राज्य सरकार ने इन बड़ी परियोजनाओं को रिकॉर्ड टाइम में स्वीकृति प्रदान की है। कई परियोजनाओं को 24 घंटे के अंदर आवश्यक जांच को पूरा करते हुए स्वीकृति प्रदान की गई है। अब जरूरत इस बात की है कि बैंक भी अपने शाखाओं के अंतर्गत निवेशकों को ऋण प्रदान करने हेतु टाइम बाउंडेड व्यवस्था को लागू करें, ताकि सरकार के प्रयास को सार्थक गति मिल सके। इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि बैंकों को खाताधारियों के बैंक खाते को आधार से जोड़ने के काम में तेजी लाने की जरूरत है। बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत गरीबों के घर बेहतर तरीके से बन सकें, इसके लिए बैंकों को आवश्यकता आधारित ऋण भी मुहैया कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार में स्वयं सहायता समूहों के अंतर्गत ऋण अदायगी के अच्छे परफॉर्मेंस देखे गये हैं। इन स्वयं सहायता समूहों को संवर्द्धित करने हेतु बैंक ऋण मुहैया कराएं।

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