नवरात्र में पिछले दो दशक से घर घर ढ़ोल बजाते है अतनदेव राम

 
Atandev Ram plays the dhol from house to house in Navratri for the last two decades

सहरसा,13 अक्टूबर  आश्विन नवरात्री के अवसर पर सदियों से ढोल पीटने की परम्परा चल रही है।पूरे दशहरा में लोगों के घर घर जाकर चिलचिलाती धूप और इसके बावजूद अतनदेव की ढोलक की थाप गुंज रही है।इनके ढलती उम्र में भी वही पुराना जज्बात आज भी कायम है। सिर्फ इस बार ही नही बल्कि पिछले दो दशक से दुर्गापूजा के दौरान

सहरसा के कई मुहल्लों में नाटे कद का उम्रदराज अतनदेव राम को ढोलक बजाते देखा जा सकता है।

वार्ड पन्द्रह निवासी अतनदेव को मलाल सिर्फ इसी बात का है की मेरे बाद इस वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन किसके द्वारा किया जायेगा।सत्तरकटैया प्रखंड के लक्षमीनिया गाँव में ढोल बजाने की परम्परा बंद होने पर मैथिली अभियानी भोगेन्द्र शर्मा ने इस परम्परा को जीवित रखने के लिए ढोल बजाने का बीड़ा उठाया है।दशहरा के दौरान गांव

हो या शहर हर घर ढोलक की थाप पड़ने की पुरानी परंपरा है। दशमी के दिन सभी घरों से ढोलक बजाने वाले को बतौर पारश्रमिक या पारितोषिक रूप में नगदी सहित सभी प्रकार के अन्न देने की व्यवस्था आज भी बनी हुई है। मगर इसमें कोई संकोच नहीं कि बहुतों अभी भी पुरातन समय के हिसाब से ही नगद सहित अन्न देने का रिवाज पर

आज भी कायम हैं। मंहगाई का दौड़ है, इसलिए दशहरा में ढोलक बजाने वाले अतनदेव हो या कोई और उपहार देने में हाथ सख्त रखने के बजाय उदारता दिखाने में कोई संकोच न करें। जिससे यह परम्परा आगे भी निरन्तर जारी रहे।

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