पट खुलते ही शंख और घंटी के साथ जयकारा से गूंज उठा वातावरण

शारदीय नवरात्रा के अंतिम चरण में लोगों की श्रद्धा, भक्ति और उल्लास चरम पर है। शंख, घंटी और माता के जयकारा से वातावरण पूरी तरह शक्ति की आराधना में लीन हो गया है
 
As soon as the doors opened the atmosphere resonated with conch shells and bells
शारदीय नवरात्रा के अंतिम चरण में लोगों की श्रद्धा, भक्ति और उल्लास चरम पर है। शंख, घंटी और माता के जयकारा से वातावरण पूरी तरह शक्ति की आराधना में लीन हो गया है। बुधवार को भक्तों ने माता दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा अर्चना की। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने महा अष्टमी व्रत भी रखा है। महागौरी की पूजा को लेकर सभी दुर्गा मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है। मंगलवार की मध्य रात के बाद मां दुर्गा के सप्तम स्वरूप कालरात्रि की पूजा अर्चना कर भगवती जागरण किया गया, उसके बाद दुर्गा मंदिरों के पट लोगों के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। पट खुलते ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। सबसे अधिक भीड़ खोईछा भरने वाली महिलाओं की लगी हुई है। पट खुलने के बाद से ही महिलाएं लगातार खोईछा भरकर परिवार, समाज, गांव और देश के सुख समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
As soon as the doors opened the atmosphere resonated with conch shells and bells
सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त के बीच श्रृंगार एवं प्रसाद सामग्री के साथ खोईछा भरने वाली महिलाएं माता दुर्गा से देश को कोरोना से बचाने की गुहार भी लगा रहे हैं। जिला मुख्यालय के बड़ी दुर्गा स्थान, बखरी पुरानी दुर्गा स्थान, लखनपुर दुर्गा स्थान, भवानंदपुर दुर्गा स्थान, बहदरपुर दुर्गा स्थान एवं शक्ति पीठ जयमंगला गढ़ में भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े हैं। गांव से लेकर शहर तक की गलियां और हर सनातन धर्मावलंबी का घर मां दुर्गा की वैदिक स्तुति एवं मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो रहा है। कहीं आरती हो रही है तो कहीं दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती पढ़ते भक्त वातावरण को माता की प्रेरणा से ओतप्रोत कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर प्रशासन की ओर से मेला लगाया जाने पर रोक है। जिसके कारण कोई विशेष व्यवस्था नहीं किया गया है, लेकिन बाजार पूजन सामग्री, खाद्य सामग्री और बच्चों के खिलौने से पटा हुआ है।

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