Lakhimpur से जुड़ा एक और वीडियो आया, शख्स ने बताई घटना की एक-एक बात

लखीमपुर खीरी में बीते दिनों हुए किसान आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा से संबंधित एक और वीडियो सोशल मीडिया में अपलोड किया गया है। एक प्रत्यक्षदर्शी युवक ने मीडिया को घटना की एक-एक बात बताई। उसने बताया कि अगर किसी ने वीडियो देखी है तो उसमें आप लोगों ने देखा होगा कि किस प्रकार से वह अपनी जान बचाकर भागा था।
 
Another video of Lakhimpur incident is public
प्रत्यक्षदर्शी ने कहा- घटना के वक्त तो आशीष मिश्रा कुश्ती कार्यक्रम स्थल पर मौजूद थे
लखीमपुर खीरी, 06 अक्टूबर । लखीमपुर खीरी में बीते दिनों हुए किसान आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा से संबंधित एक और वीडियो सोशल मीडिया में अपलोड किया गया है। एक प्रत्यक्षदर्शी युवक ने मीडिया को घटना की एक-एक बात बताई। उसने बताया कि अगर किसी ने वीडियो देखी है तो उसमें आप लोगों ने देखा होगा कि किस प्रकार से वह अपनी जान बचाकर भागा था।

उसने बताया कि वे लोग उपमुख्यमंत्री के स्वागत के लिए कालेशरण मोड़ जा रहे थे। रास्ते में तिकुनिया के पास किसानों के भेष में मौजूद उपद्रवियों ने उनकी गाड़ियों पर हमला कर दिया। लाठी-डंडे और पत्थरबाजी करनी शुरू कर दी है, जिसमें वाहन चालक घायल हो गया। इसके बाद गाड़ी किनारे जाकर रुक गई। गाड़ी आगे नहीं बढ़ी, तो वहां से इन लोगों ने चालक को खींच कर बाहर निकाल लिया।

प्रत्यक्षदर्शी ने मीडिया को बताया कि ये लोग लगातार गाड़ी को रोकने का प्रयास कर रहे थे कि कैसे गाड़ी को रोक लें और उसके अंदर जो लोग हैं, उनको मौत के घाट उतार दें। उसमें कहीं न कहीं मैं और उस गाड़ी में मेरे साथ तीन अन्य साथी भी थे जिसमें से एक गाड़ी का चालक हरिओम, मित्र शुभम मिश्रा और एक स्थानीय कार्यकर्ता था, जिसको वो नहीं जानता। वो भी उसी गाड़ी में था, जिसके बारे में अभी उनको जानकारी नहीं मिली है कि उसके साथ क्या हुआ है, लेकिन ये दोनों लोगों को देखा कि हरिओम को तो ये लोग वहीं मारने लगे थे। धारदार हथियार से उसपर हमला कर रहे थे। बाद में सोशल मीडिया में पता चला कि दोनों की हत्या कर दी गई है। आशीष मिश्रा भइया तो कार्यक्रम स्थल पर थे। चूंकि कुश्ती प्रतियोगिता कार्यक्रम सुबह से शुरू हो जाता है तो वो वहां उपमुख्यमंत्री के स्वागत के लिए मंच पर ही थे।
Another video of Lakhimpur incident is public
उसने बताया कि जब गाड़ी पर सीधे पत्थराव हो रहा था। लाठी-डंडे चल रहे थे। भय के माहौल मैं भी उस बीच से गुजरा हूं और जब मौत पर बात आई तो गाड़ी को ड्राइवर ने किसी तरीके वहां से निकालने का प्रयास किया फिर भी वो गाड़ी को नहीं निकाल पाया और उसको अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। ये किसान नहीं थे। ये उपद्रवी, दंगाई थे, मैं उन लोगों को पहचानता भी नहीं हूं। मेरे सामने उपद्रवियों ने ने पीटते-पीटते इन सबको मार डाला। इस मामले उसने पुलिस को तहरीर भी दी है।

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