राजस्थान का बुटाटी धाम : देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी आते हैं श्रद्धालु

नागौर जिले के पास अजमेर-नागौर मार्ग पर बसे कस्बे कुचेरा के पास स्थित है बुटाटी धाम जहां देश विदेश से श्रद्धालु दर्शन करने को पहुंचते हैं। बुटाटी धाम 'चतुरदासजी महाराज
 
Butati Dham of Rajasthan: Devotees come not only from the country but also from abroad
नागौर जिले के पास अजमेर-नागौर मार्ग पर बसे कस्बे कुचेरा के पास स्थित है बुटाटी धाम जहां देश विदेश से श्रद्धालु दर्शन करने को पहुंचते हैं। बुटाटी धाम 'चतुरदासजी महाराज के मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है।
Butati Dham of Rajasthan: Devotees come not only from the country but also from abroad
मान्यता है कि काफी वर्षों पूर्व यहां जन्मे एक महान सिद्ध योगी चतुरदासजी वर्षों पहले अपनी चमत्कारिक सिद्धियों से लकवा के रोगियों को मुक्त करते थे। दावा किया गया है कि आज भी देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी यहां लकवा से पीडि़त रोगी आते हैं और सकारात्मक शक्ति लेते हुए ठीक होकर जाते हैं। हाल के वर्षों में ही बुटाटी धाम की चमत्कारिक शक्तियों के बारे सुनकर अमेरिका के शिकागो से यहां आयी जेनिफर भी ठीक होकर गईं हैं। जेनिफर ने यहां 'पॉजिटिव एनर्जी' लेने के बाद बताया था कि एक दिन वह बाइक से कहीं जा रही थी कि सड़क दुर्घटना में पहले उसे फ्रेक्चर हुआ और बाद में देखते ही देखते वह चल नहीं सकती थीं और लकवाग्रसित हो गयीं। जब उन्हें उसके पुरुष मित्र ने इस चमत्कारी स्थान बुटाटी धाम की खोज-बीन करके बताया तो वह यहां आने की जिद करने लगी और यहां आने के बाद उसे काफी 'पॉजिटिव एनर्जी' मिली। जेनिफर ने बताया कि उन्हें यहां काफी अच्छा महसूस हुआ और बुटाटी धाम की दिव्य शक्ति के सहारे ही पुन: वह अपने पैरों पर चल सकने में एकबारगी कामयाब हो गयीं। जेनिफर ने यहां से वापिस अमेरिका जाने से पहले बताया कि वह अमेरिका के लोगों से भी यह बात शेयर करेंगी कि बुटाटी धाम में लकवाग्रसित लोगों को पुन: 'जीवनदान' ही मिलता है।

जेनिफर के साथ आए आशुतोष शर्मा ने बताया कि बुटाटी धाम के बारे में उनसे सुनने के बाद से ही जेनिफर यहां आने की जिद कर रही थी इसलिए उन्हें यहां बुटाटी धाम लाया गया था। शर्मा के अनुसार पीडि़त मानवता की सेवा के लिए यहां हर कोई सेवा के लिए तत्पर रहता है।

From Around the web