Xiaomi समेत अन्य चीनी स्मार्टफोन को फेंक दें, इस देश की सरकार ने अपने नागरिकों को दी सलाह

 
Throw away other Chinese smartphones including Xiaomi the government of this country advised its citizens

26 सितम्बर 2021. मेड इन चाइना स्मार्टफोन को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। लिथुआनियाई सरकार ने अपने नागरिकों से चीनी स्मार्टफोन फेंकने के लिए कहा है। इतना ही नहीं, सरकार ने भविष्य में चीनी फोन नहीं खरीदने की भी बात कही है।

सरकार ने इसके लिए दो स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों के नाम भी जारी किए हैं। उन्होंने Xiaomi और Huawei से स्मार्टफोन्स को बाहर करने के लिए कहा है। इसके पीछे की वजह फोन की बिल्ट-इन सेंसरशिप है। इसके कारण फोन में कुछ शर्तें ब्लॉक हो जाती हैं।

आपको यह भी बता दें कि लिथुआनिया ने यह आरोप नए समय पर लगाया है जब दोनों देशों के बीच संबंध अच्छे नहीं हैं। लिथुआनियाई रक्षा मंत्रालय के राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा केंद्र की एक नई रिपोर्ट में चीनी स्मार्टफोन के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सिस्टम ऐप Xiaomi फोन में स्वचालित रूप से 449 स्थितियों को सेंसर करता है। इनमें फ्री तिब्बत, लॉन्ग लाइव ताइवान इंडिपेंडेंस, डेमोक्रेटिक मूवमेंट जैसे शब्द शामिल हैं। लिथुआनिया साइबर सिक्योरिटी के मुताबिक, Xiaomi के फ्लैगशिप फोन Mi 10T 5G ने यूरोप में सेंसरशिप क्षमता दिखाई।

Throw away other Chinese smartphones including Xiaomi the government of this country advised its citizens

एजेंसी ने कहा कि इसे यूरोपीय संघ के इस क्षेत्र के लिए बंद कर दिया गया था लेकिन इसे किसी भी समय दूरस्थ रूप से चालू किया जा सकता है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, उप रक्षा मंत्री मार्गरिस अबुकेविसियस ने लोगों से नए चीनी फोन नहीं खरीदने की अपील की। इसके अलावा पुराने फोन को जल्द से जल्द डिलीट कर दें।

इस बारे में जब हमारे पार्टनर इंडिया टुडे टेक ने Xiaomi से बात की तो कंपनी ने कहा कि उसके डिवाइस में किसी भी तरह का सेंसरशिप सॉफ्टवेयर नहीं है। यह उपयोगकर्ताओं के कानूनी अधिकारों का सम्मान और सुरक्षा करता है।

नेशनल साइबर सेंटर लिथुआनिया के मुताबिक, चीनी स्मार्टफोन में एक और खामी भी पाई गई। Xiaomi के बारे में कहा गया था कि फोन सिंगापुर में एक सर्वर पर एन्क्रिप्टेड फोन उपयोग डेटा भेज रहा था।

साथ ही Huawei P40 5G में भी खामियां पाई गईं। हालांकि, जांच में पाया गया कि वनप्लस दोषी नहीं था। हुआवेई ने भी बीएनएस न्यूजवायर से बातचीत में आरोपों का खंडन किया।

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