अफगानिस्तान में सरकार चलाने के लिए तालिबान को समय दिया जाना चाहिए : शेख राशिद खान

अफगानिस्तान के आंतरिक मंत्री शेख राशिद खान ने कहा है कि तालिबान को अफगानिस्तान में सरकार चलाने के लिए समय दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय
 
Taliban should be given time to run government in Afghanistan Sheikh Rashid Khan

अफगानिस्तान के आंतरिक मंत्री शेख राशिद खान ने कहा है कि तालिबान को अफगानिस्तान में सरकार चलाने के लिए समय दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि वह अफगानिस्तान में जमीनी हकीकत को समझें।

Taliban should be given time to run government in Afghanistan Sheikh Rashid Khan



राशिद ने कहा कि वर्तमान स्थिति में अफगान के लोगों को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। साथ ही मानवीय आधार पर उन्हें उन्हें भोजन, दवाएं और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जाएं।

गुरुवार को इस्लामाबाद में शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त फिलिपो ग्रांडी के साथ एक बैठक के दौरान राशिद ने कहा कि पाकिस्तान तालिबान शासित अफगानिस्तान में स्थायी शांति चाहता है, क्योंकि उन्होंने देश में शासन के लिए वित्तीय और मानव संसाधन के प्रावधान की आवश्यकता पर बल दिया। दुनिया को अफगानिस्तान के बारे में जमीनी हकीकत को समझने की जरूरत है।

राशिद ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान में मौजूद अफगान नागरिकों और विदेशियों को निकालने में पाकिस्तान चौबीसों घंटे काम कर रहा है। मौजूदा स्थिति के संदर्भ में पाकिस्तान में कोई अफगान शरणार्थी और कोई शरणार्थी शिविर नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि तालिबान ने पिछले हफ्ते अफगानिस्तान में अंतरिम इस्लामिक सरकार का गठन किया। तालिबान के पाकिस्तान के साथ गहरे संबंध रहे हैं और उस पर तालिबान समूह को खुले तौर पर और गुप्त रूप से समर्थन देने का आरोप लगाया गया है। हालांकि इस्लामाबाद ने इन आरोपों का खंडन किया है।

कई देशों ने कहा है कि वे देखेंगे कि तालिबान अपने शासन को राजनयिक मान्यता देने से पहले एक समावेशी अफगान सरकार और मानवाधिकार सुनिश्चित करने के अपने वादों को पूरा करता है या नहीं।



इस हफ्ते की शुरुआत में ग्रांडी ने देश के अंदर अफ़गानों और विदेश भाग गए शरणार्थियों के लिए "तत्काल और निरंतर" समर्थन की अपील की थी। बुधवार को अफगानिस्तान में अपनी तीन दिवसीय यात्रा को बाद ग्रांडी ने चेतावनी थी कि अगर अगर सार्वजनिक सेवाएं और अर्थव्यवस्था ढह जाती है तो हम देश के भीतर और बाहर और भी अधिक पीड़ा, अस्थिरता और विस्थापन देखेंगे।

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