सैन्य वार्ता में भारत की मांगों को नाजायज बताकर भड़का चीन

पूर्वी लद्दाख के सीमा मुद्दों पर रविवार को हुई कोर कमांडर स्तरीय 13वीं वार्ता को बेनतीजा बताते हुए चीन ने भारत की मांगों को नाजायज ठहराया है। इतना ही नहीं चीनी विशेषज्ञों ने एक नए संघर्ष के जोखिमों की चेतावनी देते हुए चीन को भारत की मांगें मानने से इनकार करने के साथ ही एक और भारतीय सैन्य आक्रमण से बचाव के लिए भी तैयार रहने की सलाह दे डाली है।

 
INDIA CHINA MILITRY TALK-CHINESE REACTION

- चीनी रक्षा विशेषज्ञों ने भारत के साथ नए संघर्ष के जोखिमों की दी चेतावनी
- भारतीय सैन्य आक्रमण से बचाव के लिए भी तैयार रहने की दे डाली सलाह

 

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर । पूर्वी लद्दाख के सीमा मुद्दों पर रविवार को हुई कोर कमांडर स्तरीय 13वीं वार्ता को बेनतीजा बताते हुए चीन ने भारत की मांगों को नाजायज ठहराया है। इतना ही नहीं चीनी विशेषज्ञों ने एक नए संघर्ष के जोखिमों की चेतावनी देते हुए चीन को भारत की मांगें मानने से इनकार करने के साथ ही एक और भारतीय सैन्य आक्रमण से बचाव के लिए भी तैयार रहने की सलाह दे डाली है।

भारत के साथ 13वें दौर की सैन्य वार्ता के बाद चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की वेस्टर्न थिएटर कमांड ने सोमवार को आरोप लगाया कि भारत ने हाल ही में सीमा के पूर्वी हिस्से में नई घटनाओं को भी जन्म दिया है। पीएलए वेस्टर्न थिएटर कमांड ने कहा कि कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता के दौरान भारत ने अनुचित और अवास्तविक मांगों पर जोर दिया, जिससे बातचीत में मुश्किलें आईं। सीनियर कर्नल लॉन्ग शाओहुआ ने अपने बयान में कहा कि वार्ता के दौरान भारत ने चीन को केवल भारत के पक्ष में रियायतें देने का प्रयास किया।

सिंघुआ विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय रणनीति संस्थान में अनुसंधान विभाग के निदेशक कियान फेंग ने सोमवार को ग्लोबल टाइम्स से कहा कि चीन बड़ी तस्वीर पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है, इसीलिए वार्ता में भारत की मांगे मानने से इनकार करना पड़ा। कियान ने कहा कि अगर भारत नवीनतम वार्ता में प्रदर्शित चीन के रुख की अनदेखी करता है और खुद को बदले बिना अपनी आक्रामकता को जारी रखता है या बढ़ाता है, तो एक और दुर्घटना या संघर्ष की संभावना पैदा हो सकती है।

चीनी सैन्य विशेषज्ञ और टीवी कमेंटेटर सोंग झोंगपिंग ने कहा कि भारत सीमा के साथ चीनी क्षेत्रों को जब्त करने की साजिश रच रहा है। यह एक बहुत ही आक्रामक कदम है और दोनों पक्षों की व्यावहारिक जरूरतों के पूरी तरह से खिलाफ है। उनका यह भी आरोप है कि चीनी भूमि पर भारतीय आक्रमणों के कारण मई, 2020 से दोनों देशों के बीच टकराव बना हुआ है।

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दूसरी तरफ बैठक के बाद जारी बयान में रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस कोर कमांडर स्तर की वार्ता में हॉट स्प्रिंग्स और कुछ अन्य विवादित क्षेत्रों से दोनों सेनाओं के विस्थापन पर चर्चा हुई। रविवार को हुई वार्ता में पूरा फोकस हॉट स्प्रिंग्स में एक बफर जोन बनाने पर रहा ताकि इस इलाके में भी विस्थापन प्रक्रिया शुरू हो सके। इसके बावजूद कोई समाधान नहीं निकला, बल्कि दोनों पक्ष संवाद बनाए रखने और जमीनी स्तर पर स्थायित्व बनाए रखने पर सहमत हुए। दोनों पक्षों ने उम्मीद जताई कि द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करते हुए शेष मुद्दों के शीघ्र समाधान की दिशा में चर्चा जारी रहेगी।

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