स्त्री फिल्म के इस हीरो की असल जिन्दगी की प्रेम कहानी किसी फिल्म से बिलकुल कम नहीं है आप खुद कहेंगे

आज हम आपको बताएँगे कि किस भारतीय अभिनेता ने अपनी प्रेम कहानी को फिल्मी बनाया। भारतीय सिनेमा मे हर रोज लाखो युवा अपनी तमन्ना लेकर आते हैं कि वो भी एक सफल अभिनेता बनेंगे लेकिन उन सब के सपने पूरे नहीं होते। कहीं न कहीं वो फ़ेल हो जाते हैं। डाक विभाग में नौकरी का
 
स्त्री फिल्म के इस हीरो की असल जिन्दगी की प्रेम कहानी किसी फिल्म से बिलकुल कम नहीं है आप खुद कहेंगे

आज हम आपको बताएँगे कि किस भारतीय अभिनेता ने अपनी प्रेम कहानी को फिल्मी बनाया।  भारतीय सिनेमा मे हर रोज लाखो युवा अपनी तमन्ना लेकर आते हैं कि वो भी एक सफल अभिनेता बनेंगे लेकिन उन सब के सपने पूरे नहीं होते। कहीं न कहीं वो फ़ेल हो जाते हैं।

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अब फर्क ये है कि कुछ उन गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ते हैं और कुछ बिखर जाते हैं। आज हम आपको एक ऐसे अभिनेता के बारे मे बताने जा रहे है जो न केवल सफल हुआ बल्कि एक मुकाम हासिल किया।

स्त्री फिल्म के इस हीरो की असल जिन्दगी की प्रेम कहानी किसी फिल्म से बिलकुल कम नहीं है आप खुद कहेंगे

चलिये आपको पहेली न बुझाते हुये उसका नाम बता देते हैं। हम बात कर रहे हैं पंकज त्रिपाठी की जिन्होने अपने अभिनय का लोहा मनवा लिया इस भारतीय सिनेमा मे।

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वैसे तो पंकज जी ने साल 2004 मे भारतीय सिनेमा मे अपना पहला शॉट दिया लें उनको लोगो ने पहचाना 2012 मे आई फिल्म “गैंग्स ऑफ वासेपुर” मे जिसमे उन्हे एक अलग पहचान मिली। उसके बाद इन्होने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और बुलंदी के शिखर पर आगे बढ़ते चले गए।

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लेकिन क्या आपको पता है उनके इस संघर्ष मे उनका साथ किसने दिया? उनकी पत्नी मृदुला जी ने। पेशे से एक अध्यापिका होते हुये भी उन्होने अपना घर भी संभाला और पंकज को उनके सपने जीने की आज़ादी दी। पंकज जी आज भी कहते हैं कि मेरे लिए आज भी मृदुला ही “मैन ऑफ हाउस” हैं।

स्त्री फिल्म के इस हीरो की असल जिन्दगी की प्रेम कहानी किसी फिल्म से बिलकुल कम नहीं है आप खुद कहेंगे

पंकज कि प्रेम कहानी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। वो बताते है कि मैंने उन्हे 1993 मे पहली बार देखा था और उसी वक़्त मन बना लिया था कि इस लड़की के साथ ही अपनी पूरी ज़िंदगी बिताऊँगा। उस समय वो अपनी बहन के तिलक मे गए थे और उसी वक़्त उन्होने मृदुला जी को देखा और मृदुला जी ने भी पलट कर उन्हे देखा। बस फिर क्या था, पहली नज़र मे इश्क़ हो गया पंकज जी को और उन्होने ठान लिया।

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परिवार वाले इस विवाह को राजी न हुये और काफी मुश्किले उठानी पड़ी लेकिन पंकज जी अपने निश्चय से पीछे नहीं हटे और साल 2004 मे उन्होने शादी की। उनकी एक बेटी भी है। पंकज जी बताते है कि मृदुला मेरी साले की बहन हैं और ये बात बहुत ही कम लोग जानते हैं।

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इसलिए इस शादी के लिए मुझे बहुत ही पापड़ बेलने पड़े क्यूंकी ब्राह्मण मे अपनी बहन के घर मे अपनी शादी करना वर्जित होता है। पंकज ये कहते हुये “अब मै अपने ही साले का साला हूँ।” हंसने लगे।

नोट- अपने विचार और सुझाव हमे कमेंट मे बताए।

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