राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव में पश्चिम बंगाल के कलाकारों ने दिखाया शास्ति अर्थात ''दण्ड''

बिहार की सांस्कृतिक राजधानी बेगूसराय में लगातार नाटक से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन चलते रहता है। इसी कड़ी में एक बार फिर आजादी के अमृत महोत्सव पर आस्था
 
Artists of West Bengal showed punishment in the National Theater Festival
बिहार की सांस्कृतिक राजधानी बेगूसराय में लगातार नाटक से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन चलते रहता है। इसी कड़ी में एक बार फिर आजादी के अमृत महोत्सव पर आस्था वेलफेयर सोसाइटी की ओर से दो दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव आस्था नाट्य रंग का आयोजन किया गया है। बेगूसराय आईटीआई लवहरचक रामदीरी के प्रेक्षागृह में आयोजित महोत्सव के पहले दिन विश्वविख्यात कवि-साहित्यकार रवींद्रनाथ टैगोर की मूल रचना का सफलतम नाट्य-मंचन पश्चिम बंगाल की रंग संस्था गोबरडंगा रंगभूमि के द्वारा किया गया। ग्रामीण संस्कृति को दर्शाता यह नाटक ''शास्ति अर्थात दण्ड'' गरीब परिवार के आपसी तालमेल और आत्मीयतापूर्ण संबंधों को व्यक्त करता है। दिखाता है कि समाज के धनवानों और पूंजीपतियों द्वारा आज भी अर्थहीन परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है। प्रस्तुति में एक पुरुष सत्तात्मक समाज के क्रूरतापूर्ण व्यवहार को स्पष्ट रूप से दिखाया गया कि देश में आजादी के इतने वर्षों बाद भी पुरुषों द्वारा नारियों का जबरन शोषण और उत्पीड़न का शिकार बना कर उसकी स्वतंत्रता एवं बुलंद आवाजों को सदा के लिए खत्म कर देने की सजा दे दी जाती है।
Artists of West Bengal showed punishment in the National Theater Festival
नाटक के मूल चिन्ह के रूप में ''फांसी का फंदा सहित ताबीज का खुला माला'' से प्रस्तुति की शुरुआत में ही निर्देशक ने स्पष्ट कर दिया कि इस प्रभावित समाज से किस तरह एक पीड़ित व्यक्ति खुद को इस बोझिल दुनिया से मुक्त होना चाहता है। रवींद्रनाथ टैगोर की मूल रचना का बीरु मुखोपाध्याय द्वारा बांग्ला रूपांतरित नाटक ''शास्ति'' का निर्देशन एवं परिकल्पना पश्चिम बंगाल के सक्रिय युवा रंगकर्मी विधानचंद्र हल्दर ने किया। महोत्सव का शुभारंभ प्रसिद्ध रंग निर्देशक अमित रौशन, वरिष्ठ रंगकर्मी अवधेश सिन्हा, चर्चित युवा निर्देशक प्रवीण कुमार गुंजन ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया तथा कवि प्रफुल्ल कुमार मिश्र, वरिष्ठ रंग निर्देशक गणेश गौरव ने अतिथियों का स्वागत प्रतीक चिन्ह और अंग-वस्त्र से किया। नाटक के मुख्य पात्र बड़े भाई दुःखी की भूमिका में नीरज मंडल, उसकी पत्नी बड़ी बहू राधा की भूमिका में महुआ मुखर्जी, छोटा भाई छीदम के किरदार में इब्राहिम मंडल, छोटी बहू चंद्रा की भूमिका में संध्या बारुइ ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुनीम रामलोचन की भूमिका में देवाशीष सरकार तथा जमींदार के लठैत की भूमिका में सागर गाईन ने बेहतरीन अभिनय कर लोगों को खूब मनोरंजित किया। कोरस की भूमिका में इशानी अख़्तरी, प्रिया बारुई, सुरैया अख़्तरी ने अपने अभिनय से नाटक की जीवंतता को बरकरार रखा। संगीत संचालन राहुल बारुई, स्टेज मैनजमेंट दीपंकर शिल तथा रूप सज्जा एवं मुख-सज्जा संध्या बारुइ तथा प्रकाश परिकल्पना विधानचंद्र हल्दर ने किया।

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