तालिबान का पाकिस्तान को साफ संदेश, सरकार पर नसीहत देने का अधिकार किसी को नहीं

 
Afghanistan Taliban Pakistan inclusive government
काबुल, 21 सितंबर। अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जा के लिए हरसंभव मदद करने वाले पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ रही है। तालिबान ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को समावेशी सरकार बनाने की नसीहत पर दो टूक जवाब देते हुए कहा है कि किसी भी देश को अफगानिस्तान में सरकार के गठन पर राय देने का कोई अधिकार नहीं है।

तालिबानी प्रवक्ता और उप-सूचना मंत्री जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि पाकिस्तान या किसी और देश को यह मांग करने का अधिकार नहीं है कि अफगानिस्तान में 'समावेशी सरकार' बने। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने शनिवार को कहा था कि उन्होंने काबुल में एक समावेशी सरकार के लिए तालिबान के साथ 'बातचीत शुरू' की है, जिसमें ताजिक, हजारा और उज्बेक समुदाय के लोग शामिल होंगे।
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शंघाई सहयोग संगठन (एसीओ) के सदस्य देशों ने कहा था कि युद्धग्रस्त देश में एक समावेशी सरकार होना महत्वपूर्ण है, जिसमें सभी जातीय, धार्मिक और राजनीतिक समूहों के प्रतिनिधि हों। वहीं, तालिबानी नेता मोहम्मद मोबीन ने भी कहा था कि अफगानिस्तान को किसी ने यह अधिकार नहीं दिया है कि समावेशी सरकार की मांग करे। मोबीन ने सवाल किया था कि क्या समावेशी सरकार का मतलब यह होगा कि पड़ोसी अपने प्रतिनिधि और जासूस भेज सकें?

शंघाई सहयोग संगठन के नेताओं ने संगठन के वार्षिक शिखर सम्मेलन के समापन के बाद जारी की गई एक संयुक्त घोषणा में शुक्रवार को कहा था कि अफगानिस्तान को आतंकवाद, युद्ध और मादक पदार्थों से मुक्त स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण देश बनना चाहिए और युद्धग्रस्त देश में एक 'समावेशी' सरकार का होना महत्वपूर्ण है, जिसमें सभी जातीय, धार्मिक और राजनीतिक समूहों के प्रतिनिधि शामिल हों।

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