करीब चार दशक के बाद स्पेशल सेल में आईपीएस की एंट्री

 
IPS entry in Special Cell after nearly four decades

नई दिल्ली, 28 सितंबर  खुद को टॉप-कॉप कहने वाली दिल्ली पुलिस देश की सबसे स्मार्ट पुलिस मानी जाती है। इसकी स्पेशल सेल यूनिट आतंक और गैंगस्टर के खिलाफ एक्शन लेने में सबसे आगे है। इन सब के बाद करीब 38 साल के इतिहास में पहली बार स्पेशल सेल में तीन आईपीएस डीसीपी की तैनाती हुई है। पूर्व डीसीपी एलएन राव के अनुसार, इन अधिकारियों की तैनाती का प्रमुख कारण स्पेशल सेल को और अधिक मजबूत करना है।

ऑपरेशन सेल से हुआ स्पेशल सेल

स्पेशल सेल के पूर्व डीसीपी एलएन राव ने बताया कि वर्ष 1983 में सबसे पहले स्पेशल सेल का गठन दिल्ली पुलिस में किया गया था। उस समय गृह मंत्रालय के निर्देश पर आतंकियों की कमर तोड़ने के लिये ऑपरेशन सेल के नाम से यह यूनिट बनाई गई थी। उक्त यूनिट में 25 पुलिसकर्मियों की एक टीम थी जिसे एसीपी लीड करते थे और यह पूरी यूनिट स्पेशल ब्रांच के एडिशनल डीसीपी को रिपोर्ट करती थी।

उन्होंने बताया कि उस समय केवल पंजाब और दक्षिण भारत में आतंकी गतिविधियां जारी थी। पंजाब के कई आतंकी दिल्ली में आकर रुकते थे, जिसके चलते दिल्ली में भी आतंकी गतिविधियों के बढ़ने की संभावना थी। इससे निपटने के लिए ऑपरेशन सेल का गठन किया गया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में इसका नाम ऑपरेशन सेल से बदलकर स्पेशल सेल कर दिया गया था।

1990-91 में सीमापार से आए आतंकी हुए सक्रिय

पूर्व डीसीपी ने बताया कि वर्ष 1990-91 से पाकिस्तान समर्थित आतंकी गतिविधियां तेज हो गई । उस समय से ज्वाइंट सीपी और स्पेशल सीपी स्तर पर आईपीएस अधिकारी स्पेशल सेल की निगरानी करते हैं, लेकिन करीब चार दशक से दानिप्स डीसीपी ही स्पेशल सेल को मुख्य रूप से संभाल रहे हैं। अभी के समय में स्पेशल सेल की चार अलग-अलग विभाग है। इन चारों को चार दानिप्स अफसर संभाल रहे हैं, यह अफसर प्रमोद कुशवाहा (दक्षिण रेंज), संजीव यादव (उत्तरी रेंज), मनीषी चंद्रा (काउंटर इंटेलिजेंस) और केपीएस मल्होत्रा (साइबर सेल) हैं।

इन तीन आईपीएस डीसीपी को मिली जिम्मेवारी

पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना द्वारा यहां पर पहली बार आईपीएस डीसीपी की तैनाती की गई है। वर्ष 2009 बैच के आईपीएस जसमीत सिंह, 2010 बैच के राजीव रंजन और 2011 बैच के इंगित प्रताप सिंह को स्पेशल सेल में भेजा गया है। एलएन राव की माने तो उन्हें लगता है कि इसके पीछे पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना की बेहद खास योजना है।

इसके तहत वह स्पेशल सेल को और मजबूत करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि कई बार जब स्पेशल सेल जैसी खास यूनिट से अधिकारी जाते हैं तो उनकी जगह नए अधिकारी आते हैं। ऐसे में उन्हें काफी समय इस यूनिट की कार्यशैली को समझने में लग जाता है। यह भी एक बड़ी वजह है कि स्पेशल सेल में आईपीएस अधिकारियों को तैनात किया गया है। यहां से भविष्य में अगर किसी अधिकारी का ट्रांसफर होता है या पदोन्नति होती है तो भी उसके जाने से कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा।

स्पेशल सेल में नियुक्ति की तय अवधि नहीं होती

पूर्व डीसीपी ने बताया कि स्पेशल सेल एक खास यूनिट है, जिसके चलते यहां पर किसी भी अधिकारी की नियुक्ति की तय अवधि नहीं होती। आमतौर पर अन्य यूनिटों में पुलिसकर्मियों की तैनाती की अवधि दो से चार साल या कई बार छह साल तक होती है, लेकिन स्पेशल सेल के साथ ऐसा नहीं है। यहां पर जिस तरीके से पुलिसकर्मियों का अनुभव बढ़ता जाता है वह आगे और बेहतर काम करते जाता है।

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