आधी उम्र के बाद महिलायें इस हालात में क्या चाहती हैं

अधेड़ आयु की महिलायें , जिनका मासिक धर्म बंद होने वाला होता है या बंद हो जाता है, भी अनेक प्रकार के शारीरिक-मानसिक परिवर्तनों और तनावों से गुजरती है। वे विचारने लगती है कि अब उनका सेक्स जीवन समाप्त हो गया है। अतः वे पति की ओर से अपना ध्यान लगभग पूरी तरह से हटाकर
 
आधी उम्र के बाद महिलायें इस हालात में क्या चाहती हैं

अधेड़ आयु की महिलायें , जिनका मासिक धर्म बंद होने वाला होता है या बंद हो जाता है, भी अनेक प्रकार के शारीरिक-मानसिक परिवर्तनों और तनावों से गुजरती है। वे विचारने लगती है कि अब उनका सेक्स जीवन समाप्त हो गया है। अतः वे पति की ओर से अपना ध्यान लगभग पूरी तरह से हटाकर अपने बच्चों, सखी-सहेलियों आदि में लगाने लगती है। इसका मनोशरीरी प्रभाव पति-पत्नि दोनों पर हानिकारक पड़ता है। बाहयमुखी मनोवृति की ऐसी महिलाएं सामाजिक कार्यो में अधिक रूचि लेती है। अपने बनाव-श्रृंगार आदि में दनका समय पहले से अधिक खर्च होने लगता है। वे अधिक से अधिक युवा दिखने के लिए कुछ भी करने को उत्सुक रहती है। अच्छा हो कि ऐसी महिलाएं जीवन और शरीर की वास्तविकता को समझने का प्रयत्न करें। बनाव-श्रृंगार, सामाजिक सेवा के कार्य, बच्चों में रूचि अथवा खेल-कूद इन सभी में संतुलन रखने की अत्यधिक आवश्यकता होती है। कोई भी कार्य अपनी आयु और सामाजिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए करना लाभदायक रहता है।

आधी उम्र के बाद महिलायें इस हालात में क्या चाहती हैं
इसके अतिरिक्त देरे प्रकार की महिलाएं भी पति से सेक्स संबंध रखने से दूर रहने लगता हैं। वे पूजा-पाठ, मंदिर जाना, साधु-संतों के प्रवचन सुनना आदि में पूरा ध्यान केन्द्रित कर देती हैं। ऐसी अंतर्मुखी प्रवृति वाली महिलाएं बुढ़ापे और मृत्यु के भय से ग्रस्त रहती है। प्रारंभ में वर्णित बाहयमुखी व्यक्तिव वाली कुछ महिलाएं भी होती हैैं। जो मासिक धर्म बंद हो जाने के बाद सेक्स की ओर अत्यधिक आकर्षित हो जाती हैं, क्योंकि फिर उन्हें गर्भ ठहरने का कोई भय नहीं रहता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि मासिक धर्म बंद हो जाने के बाद भी सेक्स संबंधों को बनाए रखना और पति की ओर पूरा ध्यान देना अत्यन्त आवश्यक है, परंतु इसमें अति नहीं होनी चाहिए। स्त्री-पुरूष के लिए अपने शारीरिक सामथ्र्य का ध्यान रखना स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद जरूरी है।

आधी उम्र के बाद महिलायें इस हालात में क्या चाहती हैं

मासिक धर्म बंद हो जाने के बाद अधिकांश महिलाओं का भार बढ जाता है। कुछ का रक्तचाप बढ़ने लगता है। कुछ को ‘डिप्रेशन’ याति उदास रहने का रोग लग जाता है। और काम क्रिया के प्रति ओर अरूचि जाग्रत हो जाती है। उन्हें अपना जीवन व्यर्थ अनुभव होने लगता है। शरीर के जोड़ो मे दर्द और हड़फूटन रहने लगती है।

ऐसी स्थितियों में घबराना नहीं चाहिए और किसी अनुभवी तथा योग्य डाॅक्टर से सलाह लकर अपना उपचार करवाना चाहिए। वैसे मासिक धर्म बंद हो जाने के बाद स्त्रियों के मनोशरीरी परिवर्तन प्रायः छह-सात माह में प्राकृतिक रूप से स्वतः ठीक हो जाते हैं।

ऐसी ही लाइफस्टाइल से जुडी ख़बरों को पाने के लिए यहाँ  क्लिक करें। 

From Around the web