विश्व का एक मात्र मंदिर जिसकी छाया जमीन पर नहीं पड़ती, अपने आप में है अनोखा

बृहदेश्वर अथवा बृहदीश्वर मन्दिर तमिलनाडु के तंजौर में स्थित एक हिंदू मंदिर है जो 11वीं सदी के आरम्भ में बनाया गया था। इसे तमिल भाषा में बृहदीश्वर के नाम से जाना जाता है। मंदिर आपने बहुत से देखें होंगे, पर आज हम आपको जिस मंदिर के बारे में जानकारी दे रहें हैं वह विश्व का
 
विश्व का एक मात्र मंदिर जिसकी छाया जमीन पर नहीं पड़ती, अपने आप में है अनोखा

बृहदेश्वर अथवा बृहदीश्वर मन्दिर तमिलनाडु के तंजौर में स्थित एक हिंदू मंदिर है जो 11वीं सदी के आरम्भ में बनाया गया था। इसे तमिल भाषा में बृहदीश्वर के नाम से जाना जाता है।

मंदिर आपने बहुत से देखें होंगे, पर आज हम आपको जिस मंदिर के बारे में जानकारी दे रहें हैं वह विश्व का सबसे ऊंचा मंदिर है। आज भी ग्रेनाइड से बने इस मंदिर के रहस्य को वैज्ञानिक नहीं जान पाएं हैं। आज हम आपको बता रहें हैं इस बृहदेश्वर मंदिर के बारे में। आपको सबसे पहले हम बता दें कि यह पूरा मंदिर ग्रेनाइड से बना है और ग्रेनाइड से पूरी तरह से निर्मित यह मंदिर अपने आप में एकमात्र मंदिर है। यह मंदिर अपनी वास्तुकला, भव्यता और केंद्रीय गुंबद की वजह से भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। आपको हम बता दें कि यूनेस्को ने भी इस मंदिर को विश्व धरोहर में शामिल किया हुआ है।

इस मंदिर की एक विशेषता यह है कि इसके गोपुरम की छाया कभी भी धरती पर नहीं पड़ती है। इस मंदिर के गर्भगृह के चारों ओर की दीवारों पर भगवान शिव की आकृतियां अलग-अलग मुद्राओं में बनी हुई हैं। इस प्रकार से यह दुनिया का सबसे बड़ा और ऊंचा मंदिर है, जिसमें कई रहस्य भी हैं और ये रहस्य ही आज भी लोगों को मंदिर में आने का निमंत्रण देते हैं।

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