धार्मिक मान्याताओं के अनुसार इस स्त्री-पुरुष को नहीं बनाने चाहिए सम्बन्ध

अगर आप धार्मिक मान्याताओं को मानते है तो आपको बता दे जो लोग इन मान्याताओँ को मानते और इलका पालन करते है जो यह भी जानते है कि बिना शादी के साथ रहना और दोनों के बीच संबंध बनना निकृष्ट कर्म माना जाता है। जब स्त्री और पुरुष की शादी हो जाती है।
 
धार्मिक मान्याताओं के अनुसार इस स्त्री-पुरुष को नहीं बनाने चाहिए सम्बन्ध

अगर आप धार्मिक मान्याताओं को मानते है तो आपको बता दे जो लोग इन मान्याताओँ को मानते और इलका पालन करते है जो यह भी जानते है कि बिना शादी के साथ रहना और दोनों के बीच संबंध बनना निकृष्ट कर्म माना जाता है। जब स्त्री और पुरुष की शादी हो जाती है।

धार्मिक मान्याताओं के अनुसार इस स्त्री-पुरुष को नहीं बनाने चाहिए सम्बन्ध

हिन्दू धर्म में पुराणों को अधिक माना जाता है। उसमें कही हर बात को कुछ लोग आज भी अनुसरण करते है। यहां तक कि उसके अनुसार ही कोई शुभ काम, यात्रा के लिए जाते है। शास्त्रों में कई ऐसी बाते बताई गई है। जिसका पालन करने से जीवन में कई समस्याओं से निजात मिल जाते है। कहते है अगर कोई समस्या हो तो पुराणो में दी गई बातों को मानो जरुर आपको सफलता मिलेगी। इसी तरह पुराणों में यह भी बताया गया है कि किस दिन पति-पत्नी को एक-साथ नहीं रहना चाहिए।

धार्मिक मान्याताओं के अनुसार इस स्त्री-पुरुष को नहीं बनाने चाहिए सम्बन्ध

स्त्री-पुरुष के बीच पारस्परिक आकर्षण, सृष्टि का एक अटल सत्य है। सृष्टि की रचना ही इस आकर्षण और मिलन पर निर्भर है इसलिए यह कहना उचित ही होगा कि महिला-पुरुष का संगम अगर सामाजिक, धार्मिक और पारिवारिक मान्यताओं के अनुसार किया जाए तो यह एक बेहद पवित्र घटनाक्रम है। अगर आप धार्मिक मान्याताओं को मानते है तो आपको बता दे जो लोग इन मान्याताओँ को मानते और इलका पालन करते है जो यह भी जानते है कि बिना शादी के साथ रहना और दोनों के बीच संबंध बनना निकृष्ट कर्म माना जाता है। जब स्त्री और पुरुष की शादी हो जाती है तभी वह शुभ और हर मान्याताओं के अनुरुप माना जाता है। उसके बाद उनके बीच बनने वाले संबंधो को सही माना जाता है।

हिन्दू एक धर्म नहीं बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है, सफल जीवन और निर्बाधित खुशियों को प्राप्त करने के लिए बहुत जरूरी है हिन्दू परंपरा के अनुसार कार्य किया जाए। ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार कुछ ऐसे दिन भी हैं जिस दिन पति-पत्नी को किसी भी रूप में शारीरिक संबंध स्थापित नहीं करने चाहिए। इस समय यह संबंध निषेध माना जाता है। इससे उन दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पडता है। जानिए ऐसे कौन से दिन है जब पति-पत्नी को अलग रहना चाहिए।

पूर्णिमा की रात

शास्त्रों में माना जाता है कि पूर्णिमा की रात को भी पति-पत्नी को शारीरिक संबध नहीं बनाने चाहिए। इस दिन इन दोनों को अलग ही रहना चाहिए।

रविवार

शास्त्रों के अनुसार रविवार के दिन भी पति-पत्नी को एक दूसरे से दूर ही रहना चाहिए। शारीरिक संबंधों के लिए भी यह समय नहीं है। इससे उन दोनों के वैवाहिक डीवन में बुरा प्रभाव पडेगा।

अमावस्या

शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि अमावस्या के दिन पति-पत्नी को एक दूसरे के साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए। अगर उन्होनें ऐसा किया तो उनके विवाहित जीवन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

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