सच्चे प्यार की कदर करना सिखो, दिल को छू जाने वाले सच्चे विचार

दुनिया भर में लोग एक दुसरे से प्यार करते ही है कोई परिवार से पत्नी से बच्चों से मरते दम तक प्यार करते ही है कई लोग ऐसे भी है जोअपने उपर प्यार करने वालों की कदर ही नही करते आज हम एक ऐसे दो प्यार करने वाली प्रेमीकाओं की कहानी सुनते जो एक दुसरे
 
सच्चे प्यार की कदर करना सिखो, दिल को छू जाने वाले सच्चे विचार

दुनिया भर में लोग एक दुसरे से प्यार करते ही है कोई परिवार से पत्नी से बच्चों से मरते दम तक प्यार करते ही है कई लोग ऐसे भी है जोअपने उपर प्यार करने वालों की कदर ही नही करते आज हम एक ऐसे दो प्यार करने वाली प्रेमीकाओं की कहानी सुनते जो एक दुसरे सेजी जान से प्यार तो करते थे मगर कुछ गलतफेहमी से और गलती की वजह से एक दुसरे से अलग हो जाते है मगर एक बात बताऊ बडों ने सही कहा है अंत भला तो सब भला वैसे ही ये दो प्रेमी अंत में एक दुसरे की गलती समझ कर एक हो ही जाते है तो देखते कहानी क्या  है एक मध्यम वर्गीय परिवार था परिवार मे कुल तीन लोग ही रेहते थे उस परिवार मे शिराज नाम का लडका था शिराज जब छोटा था मतलब जब वे पांचवी कक्षा मे था तब उसका परिवार पेहले अलग शहर मे रेह रहे थे जब उसके पिताजी की बदली हो गई तब वे दुसरी ओर रेहने लगे ताकी उसके पिताजी को आने जाने मे नजदिक हो छटि कक्षा के लिए उसके पिताजी ने उसे उसी शहर मे एक हायस्कुल मे उसे दाखिल करवाया नया हायस्कुल होने की वजह से उसके कोई दोस्त नही थे

कुछ दिन गुजरने के बाद उसके साथ बैठनेवाला दोस्त से उसकी अच्छी दोस्ती हुई शिराज पढाई मे वैसे ठिक था मगर उसकी काबिलीयत को देखकर उसकी टिचर से उससे बहोत ही इच्छाए थी उस टिचर को उससे लगाव था वो रोज उसके साथ मस्ती करती रेहते थी उसको ऐसे ही तंग करती रेहती थी वो जब भी हायस्कुल नही आता था तब उसके घर फोन लगा के उसे आने के लिए केहती वो भी सब ये मस्ती मे लेता था उसी पाठशाला मे उसकी कक्षा मे रीमा नाम की एक लडकी थी वो बहोत ही होशियार थी वह स्कूल की टॉपर थी और उतनी खुब सुरुत भी एक दिन उन दोन्हों का एक गणित की प्रश्न से झगडा हुआ दोन्हो के झगडे को टिचर ने सुल जाया मगर फिर उनकी हर दिन कुछ ना कुछ वजह से झगडे होते रेहते थे शिराज उसे पुरी पाठशाला मे कुछ भी बोलता था और वो भी बोलने मे कसुर नही छोडती थी एक दिन सभी बच्चों को टिचर ने मैदान मे खेलने के लिए भेजा सभी लडकीया एक तरफ बॅाल से खेल रही थी और लडके भी दुसरी ओर क्रिकेट खेल रहे थे तबी अचानक से रीमा ने फेंका हुआ बॅाल एक लडके को लग गया उसे गुस्सा आया उसने जोर से बॅाल कई दुर फेंक दिया और रीमा को धक्का मार दिया रीमा ने उसे जोर से कान के नीचे बजाई तभी वहा से शिराज आ रहा था

तब उसने उनका झगडा देख लिया वो लडका रीमा के उपर बॅट मारने ही वाला तब शिराज ने बॅट हात मे लेकर उसे समजाया रीमा ने तुझे मारने से तेरी इज्जत गई तो ऐसा मत सोच उसकी बॅाल गलती से तुझे लग गई जब तु क्रिकेट खेल रहा है तब वो बॅाल उसे लगती तो इसी तरह से उसे समझाकर झगडे को सुलझालिया तब रीमा को लगा की हर वक्त मेरे साथ झगडा करने वाला शिराज आज मेरे साथ ऐसा बर्ताव क्यु किया उसने जाके शिराज से पुछा उसने सरल शब्दों मे कहा तुम्हारी जगह और कोई होता तो वही करता भले वो लडका हो या लडकी गलती तुम्हारी थोडी थी उसकी उन बातों पर उसने धन्यवाद कहा अगले दिन स्कुल मे पेपर थे शिराज की कुछ भी पढाई नही हुई थी उसके बाजुवाले बॅंच पर रीमा बैठी पेपर चालु हुआ एक घंटा हुआ देड घंटा हुआ शिराज कुछ लिख नही पा रहा था तभी रीमा ने उसकी ओर देखा रीमा ने पुछा कुछ चाहीए हो तो मुझे बताना शिराज उससे उत्तर मांगने मे हिचकीचा रहा था

तब रीमा ने उसे पेपर दिखा ने कोशिश की वो बोली पागल कुछ तो लिख पास तो हो मे दिखा रही हु ना फिर उसने लिखना चालु किया पेपर खतम होने के बाद उसे शुक्रिया कहा कुछ दिन बाद टिचर ने शिराज रीमा से पुछा आज तुम लोगों के झगडे कम हुए है क्या दुश्मनी खतम हो गई शिराज बोला दुश्मन तो खत्म हो गई पर हमने आपस मे सुलाह कर ली है कुछ दिन बाद रीमा के मन मे शिराज के लिए भावनाए बढने लगी और उसके मन मे भी उसके लिए भावनाए बढ गई दोन्हो एक दुसरे से प्यार से बात करने लगे जब स्कुल मे शिराज नही आता था तब वे दिन भर निराश रेहती थी और जब आता तब चेहरे पर मुस्कान सी रेहती थी जब टिचर कुछ पढा रेहती थी तब बीच बीच मे दोन्हों जन तीरची नजर से एक दुसरे की ओर देखते रेहते थे दोन्हों को एक दुसरों के लिए प्यार होने लगा मगर वो बात एक दुसरें को वो केह नही पाते ऐसे करते करते कुछ महीने गुजर गए दोन्हों दसवी कक्षा मे थे मगर तब भी इन्होने प्यार का जिकर नही किया था शिराज का घर रीमा के घर से दो गलियां छोडकर था कभी कभी शिराज सामान लेने जाता तो ऐसे ही वो रीमा की बिल्डींग से गुजरता जब वो उसे देखता तो मन ही मन खुश हो जाता था और रीमा भी कुछ ऐसा ही करती थी एक दिवाली का त्योहार आया तब सभी शिराज के दोस्त और रीमा के सहेलियां एकसाथ दिवाली की सुबह एक मैदान में एक दुसरे से मिलकर गप्पे लढाते थे

और खाना खाते थे तब शिराज ने सोचा था की आज में रीमा से अपने दिल की बाताउंगा और के मन मे भी यही खयाल था जब दोन्हों एक दुसरे के सामने आए तो थोडे घबरा रहे थे शिराज ने शुरुवात की रीमा अगर तुमने किसी लडके से प्यार किया तो तुम जिवन भर उसका साथ दे पाओगी रीमा ने सरल शब्दों मे कहा हा जरुर मगर उसका प्यार सच्चा और स्वभाव अच्छा हो तो फिर शिराज बोला एक ऐसा लडका है जो पिछले तीन साल से तुमसे प्यार कर रहा है मगर कुछ बोला नही आज तक तुमसे रीमा बोली कौन है वो तुम ही बताओ शिराज बोला तुम्हे भी पता है की लडका कौन है मगर तुम बोल नही पाती दोन्हो जन हसने लगे दोन्हो एक साथ पुछा क्या तुम मुझसे जिवन भर साथ दोगे दोन्हों का उत्तर हा ही था वो दिन शिराज के लिए बहोत खुशी का दिन था फिर दोन्हो एक दुसरे से प्यार भरी बाते करने लगे मगर दसवी के बाद शिराज ने और रीमा महाविद्यालय का दाखिला अलग अलग महाविद्यालय मे करवाया क्योंकी शिराज को अपने जिंदगी मे कुछ अलग करना था इसलिए वो शेहर से बाहर गया तब भी उनका ये प्यार कम नही था

शहर से बाहर जाने की बात रीमा को पसंद नही आइ फिर भी वो एक दुसरे करीब ही थे कुछ साल बाद शिराज फिर अपने शहर लौटा वो रीमा महाविद्यालय उसे अचानक मिलने के लिए गया मगर वहा उसने देखा की और जानकारी भी मिली तो पता चला की रीमा की जिंदगी मे कोइ और लडका आया था वो ये सुनते ही महाविद्यालय से बाहर निकला और अपने आप को दोश देन् लगा की सच्चे प्यार की इसे कोइ कदर नही मैने गलती से इस से प्यार किया मेरे पिठ पिछे सब ये चल रहा था कुछ दिन बाद रीमा का उसे संदेश आया की तुम शेहर वापस आए हो कही ओर मिलते है शिराज बोला मुझे मिलने की जरुरत नही है तुम अपने दोस्त के साथ घुमो फिरो पता चल गया मुझे की तुम्हारा सच्चा प्यार क्या है रीमा हैरान हो गई की इसे ये बात कैसे पता चली उसने एक बात बताई नही उसे फिर उसने रीमा बात करनी छोड दी रीमा के जिंदगी मे दुसरा लडका आया था

मगर वो जितना प्यार शिराज से करती थी उतना उसकी जिंदगी मे किसको महत्व नही था उस लडके ने भी कुछ दिन बाद अपने रंग रीमा को दिखाने लगा रीमा उसकी हर बात बात पर एहसास होने लगा की शिराज ने आज तक मुझे कभी दुख नही पहुचाया हमारे झगडे जरुर होते मगर दुख भरी बाते मुझसे आज तक नही की रीमा एक दिन सिधा शिराज के घर गई और शिराज से उसके मा बाप के सामने माफी मांगने लगी शिराज ने उसकी हालत को देखते उसे माफ किया और उसे बताया की मैने तुमसे एक दिन पुछा था की सच्चे लडके का साथ जिंदगी भर दे पाओगी क्या तब तुमने कहा था की सच्चा प्यार और स्वभाव अच्छा हो तो साथ जरुर दुंगी फिर साथ क्यु छोडा रीमा रोने लगी मगर शिराज ने बडे दिलसे उसे माफ कर दिया उसे पता चला की इसे अपने गलती एहसास हुआ है रीमा बोली कुछ भी हो जाए मै तुम्हारा साथ नही छोडुंगी इस तरह से दो जन वापस एक हुए

From Around the web