अभी जाने क्यों शिशु जन्म के बाद देरी से नहलाने पर अधिक कराते हैं स्तनपान ?

याद है वह समय जब शिशुओं को जन्म के बाद जल्द से जल्द नहलाया जाता था? यह एक तरह से ठीक भी था क्योंकि शिशु के पूरे शरीर पर खून और एमिनोटिक फ्लूड लगा होता है और जब अस्पताल की नर्स शिशु को साफ करके और एक मुलायम कपड़े में लपेटकर आपकी बांहों में रखतीं
 
अभी जाने क्यों शिशु जन्म के बाद देरी से नहलाने पर अधिक कराते हैं स्तनपान ?

याद है वह समय जब शिशुओं को जन्म के बाद जल्द से जल्द नहलाया जाता था? यह एक तरह से ठीक भी था क्योंकि शिशु के पूरे शरीर पर खून और एमिनोटिक फ्लूड लगा होता है और जब अस्पताल की नर्स शिशु को साफ करके और एक मुलायम कपड़े में लपेटकर आपकी बांहों में रखतीं हैं, तो यह एहसास बहुत सुकून देता है।

हालांकि समय के साथ-साथ अब कई माएं इस बात पर ज़ोर देती है कि उनके शिशु को जन्म के पहले शुरूआती 12 घंटे पूरे होने से पहले ना नहलाया जाए। इस बात को आनलाइन सर्च करने के बाद उन मांओं का मानना है कि इससे शिशु अधिक स्तनपान करते हैं। अब विज्ञान भी यह मानता है कि यह बात सच हो सकती है।

सरकारी नौकरियां यहाँ देख सकते हैं :-

सरकारी नौकरी करने के लिए बंपर मौका 8वीं 10वीं 12वीं पास कर सकते हैं आवेदन

1000 से भी ज्यादा रेलवे की सभी नौकरियों की सही जानकारी पाने के लिए यहाँ क्लिक करें 

आइए जानते हैं कि विज्ञान के अनुसार शिशु को नहलाने में देर करना स्तनपान करने से कैसे जुड़ा

ओहियो के क्लीवलैंड क्लिनिक हॉलक्रिस्ट अस्पताल में यह पता लगाने के लिए एक अध्ययन किया गया कि क्या शिशु को जन्म के बाद नहलाने में देर करने से स्तनपान करने की मात्रा पर कोई प्रभाव पड़ता है या नहीं। 1000 मांओं और शिशुओं को इस अध्ययन का हिस्सा बनाया गया, जिनमें 448 शिशुओं को जन्म के फौरन बाद नहलाया गया और बाकी 548 शिशुओं को थोड़ा देर बाद नहलाया गया।

इसका परिणाम यह निकला कि पोस्ट-इंटरवेंशन परिणाम 68.2% थे, जो कि पहले के आकंड़े 59.8% से अधिक थे। इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि जिन शिशुओं को देर से नहलाया गया, उनके फीडिंग प्लान में स्तनों के दूध की मात्रा अधिक थी। इस अध्ययन के परिणाम जरनल ऑफ ऑब्स्ट्रेटिक, गायनेकोलॉजी और नियोनैटल नर्सिंग में प्रकाशित हुए।

अभी जाने क्यों शिशु जन्म के बाद देरी से नहलाने पर अधिक कराते हैं स्तनपान ?

=तो वास्तव में शिशु को देर से नहलाने से इसका प्रभाव स्तनपान पर कैसे पड़ता है? हीथर डीसियोचिओ इसका जवाब देते हुए कहते हैं कि नवजात शिशु की देखभाल में कई कारण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हीथर अस्पताल के बेबी केयर यूनिट में नर्सिंग प्रोफेशनल की डवलपमेंट स्पेशियलिस्ट है, इन्होंने अधिकतर मांओं के अपने शिशुओं को देर से नहलाने के आग्रह के बारे में सुनकर यह अध्ययन करने का फैसला किया।

हीथर ने बताया कि शिशु के जन्म के बाद जब वह फौरन त्वचा के संपर्क में आते हैं तो वह एमिनोटेक फ्लूड की महक और शरीर के तापमान से परिचित होते हैं, जो कि गर्म होता है। उन्होंने कहा कि एमिनोटिक फ्लूड की महक स्तनों के दूध से मिलती-जुलती होती है और इसलिए शिशु फौरन दूध पीने लगते हैं। साथ ही शिशु को देरी से नहलाने पर उनके शरीर का तापमान भी सामान्य हो जाता है।

हालांकि जिन शिशुओं को फौरन नहलाया जाता है, उनके शरीर का तापमान ठंडा हो जाता है और वह स्तनों की महक से अधिक परिचित नहीं होते हैं। साथ ही नहाने के बाद शिशु थक जाते हैं और वह स्तनपान करने के बजाए सो जाते हैं।

स्तनपान कराना जरूरी है क्योंकि जन्म के बाद इसी के द्वारा आप अपने शिशु को आवश्यक पौष्टिक तत्व और इम्युनिटी पहुंचा सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन शिशु को छह महीने तक स्तनपान कराने का सुझाव देता है। इसके बाद शिशु को बर्तनों के दूध के साथ-साथ हल्का-फुल्का भोजन भी दिया जा सकता है।

इसलिए अधिकतर अस्पताल और बेबी केयर शिशु को जन्म के एक घंटे के भीतर ही स्तनपान कराने की कोशिश करते हैं। इसलिए यह और आवश्यक हो जाता है कि शिशु जन्म के फौरन बाद मां का दूध पीए। इस अध्ययन के बाद हीथर जिस अस्पताल में काम करती है, वहां अब नवजात शिशुओं को 12 घंटे के बाद नहलाया जाता है।

कुछ मामलों में जहां मां ज्यादा इंतजार नहीं कर सकतीं हैं, वहां अस्पताल मां को 2 घंटे तक इंतजार करने के लिए कहता है। क्या आप भी शिशु को स्तनपान कराना चाहती है? तो नवजात शिशु को 12 घंटे बाद नहलाने के विकल्प पर गौर करें और इसके फायदे और नुक्सान जानने के बाद अगर आप तैयार हैं तो इस तरीके को अपनाएं।

From Around the web