अपने मन को इस शोर से भरी जिंदगी से कैसे शांत करें?

शांति का मतलब तो आप सभी जानते हैं जहां शोरगुल ना हो। आज के इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में जहां पर गाड़ियों का शोर, बैंड का शोर, हर तरह के शोर से इंसान को इस तरह से जीने की आदत पड़ गई है लेकिन शोर में जीने का मतलब यह नहीं है कि हम
 
अपने मन को इस शोर से भरी जिंदगी से कैसे शांत करें?

शांति का मतलब तो आप सभी जानते हैं जहां शोरगुल ना हो। आज के इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में जहां पर गाड़ियों का शोर, बैंड का शोर, हर तरह के शोर से इंसान को इस तरह से जीने की आदत पड़ गई है लेकिन शोर में जीने का मतलब यह नहीं है कि हम शांति को भूल जाएं या फिर हमारे दिमाग और सेहत पर इसका कोई भी बुरा असर नहीं पड़ रहा है ।

आइए आज हम बात करेंगे कुछ ऐसे तरीकों के बारे में जिससे हम लोग मन से शांति को महसूस कर सकें ।

दिमाग को शांत

अपने दिमाग को शांत करने की क्षमता कुल मिलाकर हमारे जीवन के हर पहलू पर असर डालती है। क्या आप एक ऐसी स्थिति बता सकते हैं जहां शांति से ठीक होकर काम करना मायने न रखता हो।

ध्यान एक तरह से मन का प्रशिक्षण है, यह तनाव, बेचैनी, व्याकुलता और भावनाओं के उतार-चढ़ाव से उबरने का प्रभावी तरीका है।

हमारे मन में विचारों की उथल-पुथल इसी कारण होती है। ध्यान की स्थिति में आपको कुछ नहीं करना होता बस अपने आसपास की चल रही आवाजों अपनी सांसो अपने ध्यान को किसी एक चीज पर केंद्रित करना रहता है। शुरुआत में यह काफी कठिन महसूस होता है लेकिन धीरे-धीरे इसकी आदत पड़ जाती है इस तरह से आप अपने ध्यान को बार-बार भटकने से रोक सकते हैं।

हमारे दिमाग में प्रति दिन साठ से सत्तर हजार विचार आते हैं । ज्यादातर लोगों के दिमाग की स्थिति यही है आप लगातार ध्यान करते रहेंगे तो आप खुद ही नतीजे मिलेंगे।

अगर आप दिमाग को शांत करना नहीं सीखेंगे तो यह बहुत सारे विचार आपके दिमाग को प्रदूषित कर देंगे ।

प्रकृति में सहज ही मन को शांत करने और सुकून देने का गुण होता है जितना अधिक समय आप प्रकृति के बीच बताते हैं उतना ही नर्वस सिस्टम शांत हो जाता है, और आप इसका अनुभव कर पाते हैं।

कभी इस पर गौर करके प्रकृति समय जाने से पहले आप कैसा अनुभव कर रहे थे, फिर वहां समय बिताते हुए आपको कैसा लगा, उसके बाद क्या अनुभव हुआ, साथ ही साथ इस विपरीत अनुभव का एहसास होना आप में एक बेहतर समझ पैदा करता है ।

आपको एहसास होता है कि आपका दिमाग शांत हो रहा है आप खुद को पहले से ज्यादा जीवन पर व्यस्त भी महसूस कर सकते हैं । खुद का आकलन करने या कोई राय बनाने में कभी हड़बड़ी न करें बस जो अनुभव हो रहा है उसे चुपचाप महसूस करते रहे।

प्रक्रिती से आपका संपर्क आपके दिमाग में चल रहे विचारों के साथ जुड़ पाता है। आप चल रहे हैं, या बैठे हैं , अपने शरीर और उसमें हो रहा है कंपन को महसूस करें। प्रकृति की स्थिरता और ऊर्जा का आनंद ले ।

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