दिल, निमोनिया के मरीजों के लिए रामबाण है ये वृक्ष, धरती पर इच्‍छाओं की करता है पूर्ति

कल्पवृक्ष का नाम आपने कहीं न कहीं जरूर सुना होगा लेकिन मुमकिन है कि कभी देखा न हो इसे देवलोक का वृक्ष माना जाता है। इसे कल्पद्रुप कल्पतर सुरतरु देवतरु तथा कल्पलता जैसे नामों से भी जाना जाता है पुराणों के अनुसार समुद्रमंथन से प्राप्त 14 रत्नों में कल्पवृक्ष भी एक था बाद में यह
 
दिल, निमोनिया के मरीजों के लिए रामबाण है ये वृक्ष, धरती पर इच्‍छाओं की करता है पूर्ति

कल्पवृक्ष का नाम आपने कहीं न कहीं जरूर सुना होगा लेकिन मुमकिन है कि कभी देखा न हो इसे देवलोक का वृक्ष माना जाता है।

इसे कल्पद्रुप कल्पतर सुरतरु देवतरु तथा कल्पलता जैसे नामों से भी जाना जाता है पुराणों के अनुसार समुद्रमंथन से प्राप्त 14 रत्नों में कल्पवृक्ष भी एक था बाद में यह इंद्रदेव को दे दिया गया था और इंद्र ने इसकी स्थापना सुरकानन में कर दी थी।

हिंदुओं का विश्वास है कि कल्पवृक्ष से जिस वस्तु की भी याचना की जाए वही यह दे देता है यही वजह है कि धरती पर इस वृक्ष को इच्‍छाओं की पूर्ति करने वाला वृक्ष माना जाता है इसका नाश कल्पांत तक नहीं होता तूबा नाम से ऐसे ही एक पेड़ का वर्णन इस्लामी धार्मिक साहित्य में भी मिलता है जो सदा अदन मुसलमानों के स्वर्ग का उपवन में फूलता फलता रहता है।

सिद्ध नाथ और संत कल्पलता या कल्पवल्लरी संज्ञा उन्मनी को देते हैं क्योंकि उनके मतानुसार सहजावस्था या कैवल्य की प्राप्ति के लिए उन्मनी ही एकमात्र साधन है जो न केवल सभी कामनाओं को पूरी करनेवाली है बल्कि स्वयं अविनश्वर भी है और जिसे मिल जाती हैं, उसे भी अविनश्वर बना देती है।

पौराणिक धारणा है कि समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में से एक कल्पवृक्ष को देवगण स्वर्ग ले गए थे और यह बाद मेंं इंद्र के नंदन वन की शोभा बना था पांडवों ने अज्ञातवास के समय अपने तपोबल से इसे स्वर्ग से पृथ्वी पर उतारा था।

अर्जुन ने अपने वाण से पाताल तक छिद्र कर इसे रोपित कर दिया था देखने में कल्पवृक्ष काफी विशालकाय होता है इसका तना काफी मोटा होता है देखने में यह बरगद के वृक्ष के समान होता है।

अगस्त माह में इसमें सफेद फूल आते हैं जो सूखने के उपरांत सुनहरे रंग के हो जाते हैं इसके फूल कमल के फूल में मौजूद असंख्य कलियों जैसे होते हैं इसका फल नारियल की तरह होता है जो वृक्ष की पतली टहनी के सहारे नीचे लटकता रहता है।

इटावा समेत कई जगहों पर है ये वृक्ष इटावा के अलावा बाराबंकी के रामनगर रेंज व ललितपुर के एसएसपी आवास में भी कल्पवृक्ष मौजूद है शहर के प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी के परिसर में पहला कल्पवृक्ष प्रवेश द्वार पर ही है।

जबकि दूसरा डीएफओ के आवास में मौजूद है आजादी से पहले इन वृक्षों की स्थापना यहां पर की गई थी आसपास के रहने वाले लोग यहां पर नियमित तौर पर पूजा पाठ करने के लिए आते हैं और मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं

समुद्र मंथन से निकला था कल्पवृक्ष वन विभाग परिसर में विभाग द्वारा जो शिला पट्टिका लगाई गई है उसमें कल्पवृक्ष के महत्व का उल्लेख किया गया है।

दिल के मरीजों के लिए फायदेमंद इसके बीजों का तेल हृदय रोगियों के लिए लाभकारी होता है इसके तेल में एचडीएल हाईडेंसिटी कोलेस्ट्रॉल होता है इसके फलों में भरपूर रेशा फाइबर होता है। मानव जीवन के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व इसमें मौजूद रहते हैं।

पुष्टिकर तत्वों से भरपूर इसकी पत्तियों से शरबत बनाया जाता है और इसके फल से मिठाइयां भी बनाई जाती हैं विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के अनुसार हमारे शरीर में आवश्यक 8 अमीनो एसिड में से 6 इस वृक्ष में पाए जाते हैं।

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