कहानी विक्रम बेताल की :- जानिए क्यों बार बार बेताल पेड पर जाकर लटक जाता था

Vikaram aur Betal Story : बचपन में हम सभी ने विक्रम और बेताल की कहानियाँ सुनी या पढ़ी होगी. उस कहानी के अनुसार राजा विक्रम रात को जंगल में जाता है और पेड पर लटक रहे बेताल को अपने कंधे पर उठाकर चल पड़ता. आखिर ऐसा क्या था जिसके लिए विक्रम बेताल को पेड़ से
 
कहानी विक्रम बेताल की :- जानिए क्यों बार बार बेताल पेड पर जाकर लटक जाता था

Vikaram aur Betal Story : बचपन में हम सभी ने विक्रम और बेताल की कहानियाँ सुनी या पढ़ी होगी. उस कहानी के अनुसार राजा विक्रम रात को जंगल में जाता है और पेड पर लटक रहे बेताल को अपने कंधे पर उठाकर चल पड़ता. आखिर ऐसा क्या था जिसके लिए विक्रम बेताल को पेड़ से उतारकर अपने कंधे पर उठाकर चलता था और बेताल बार बार वापस पेड़ पर जाकर लटक जाता था.

Vikaram aur Betal Story: कहानी कुछ इस तरह है. राजा विक्रम जिसे विक्रमादित्य नाम से भी जाना जता है. उसकी किर्ती सारे विश्व में फैली हुई थी. वीर विक्रमादित्य अपने ज्ञान, वीरता और धर्म आचरण के लिए प्रसिद्ध था. वह महाकाल की उज्जैन नगरी का राजा था. माना जाता है की विक्रमादित्य का राज्य उज्जैन से लेकर इरान, ईराक तक फैला हुआ था. ऐसा कह सकते है की विक्रमादित्य भारत का अंतिम चक्रवर्ती राजा था. जिस नक्षत्र में विक्रम का जन्म हुआ उस नक्षत्र में अन्य दो लोगों का जन्म भी हुआ था. उनमे से एक था तैली का बेटा जो पाताल लोक में राज करता था और एक था कुंभार का बेटा जो जंगल में जाकर योग साधना करता था.

विक्रम के राज्य में एक पाखंडी तांत्रिक था जिसे यह बात पता चल गई थी कि राजा विक्रमादित्य और कुंभार का बेटा है वह सर्व गुण संपन्न है. वह तांत्रिक उन दोनों की बलि चढ़ाकर सिद्धियाँ प्राप्त करना चाहता था. जो कुंभार का बेटा था उसको इस दुष्ट तांत्रिक की इच्छा का पता चल गया था. इसलिए वह जंगल में जाकर एक पेड पर उलटा लटककर साधना कर रहां था. उस तांत्रिक के लिए यह संभव नहीं था कि वह स्वयं जाकर उस मुर्दे को पकड़ लाए. उसने सोचा क्यों ना यह काम राजा विक्रमादित्य के हाथो ही करवाया जाया और बाद में उन दोनों की में बलि दे दूंगा.

इसके बाद वह तांत्रिक नित्य राजा विक्रम के दरबार में जाने लगा. वह अपने साथ एक फल ले जाता. तांत्रिक बिना कुछ कहे वह फल राजा विक्रम को भेट करता और वहां से चला जाता. जब उस फल को काटा जाता तो उसमे से एक अमूल्य रत्न निकलता. कुछ दिनों तक ऐसा चलता रहा. एक दिन राजा विक्रम ने उस तांत्रिक को बुलाकर पूछा कि आप क्यों मेरे लिए यह फल लाते है और बिना कुछ कहे चले जाते है.

तब तांत्रिक ने जवाब दिया की में एक तंत्र साधना कर रहा हूँ अगर यह मेरी साधना सिद्ध हो जायेगी तो में इसके द्वारा बहुत लोगों का भला कर सकूंगा. परन्तु मुझे इस साधना को पूरी करने के लिए तुम्हारी आवश्यकता है. इसके लिए तुम्हे रात को अकेले ही मेरे आश्रम में आना होगा और मेरा एक कार्य करना होगा. राजा विक्रम उस तांत्रिक की बात मानकर उसकी मदद करने के लिए तैयार हो गया.

रात को जब विक्रम उस तांत्रिक के आश्रम में गया तो तांत्रिक ने उसे वन में जाने को कहा और कहा कि वन में पेड पर लटकता हुआ एक मुर्दा मिलेगा. वह मुर्दा मुझे तांत्रिक अनुष्ठान पूरा करने के लिए चाहिए. इसलिए तुम उस मुर्दे को जाकर ले आओ.

यह मुर्दा कोई ओर नहीं वह कुंभार का बेटा था. जो यह जानता था कि तांत्रिक एक ढोंगी है. तांत्रिक के कहे अनुसार विक्रम जंगल में जाता है और उस मुर्दे को कंधे पर उठाकर चल पड़ता है. जब राजा विक्रम उस मुर्दे को उठाकर चलता है तो वह मुर्दा जोर जोर से हंसने लगता है. जब मुर्दा हंसने लगा तो विक्रम को आश्चर्य हुआ. विक्रम ने पूछा तुम कौन हो. तब मुर्दे ने कहा मेरा नाम बेताल है. मुझे पता है तुम कौन हो और मुझे कहाँ ले जा रहे हो. परन्तु में ऐसे तुम्हारे हाथ नहीं आने वाला. मेरी एक शर्त है की अगर रास्ते में तुम कुछ भी बोले तो में वापस पेड पर जाकर लटक जाउंगा. और फिर विक्रम उस मुर्दे को उठाकर चलने लगता है.

उसके बाद बेताल राजा विक्रम को एक एक करके पच्चीस कहानियां कहता है और हर कहानी के अंत में एक सवाल पूछता है जिसका जवाब राजा विक्रम को देना ही पड़ता है नहीं तो राजा विक्रम के सिर के टुकड़े टुकड़े हो जाते. जब भी राजा विक्रम बेताल के सवाल का जवाब देता है तो बेताल अपनी शर्त के अनुसार वापस पेड पर जाकर लटक जाता है.

जब बेताल राजा विक्रम को अंतिम कहानी सुनाता है तो उस दुष्ट तांत्रिक का रहस्य भी कह देता है और उस तांत्रिक को मारने का उपाय भी विक्रम को बता देता है. जिसकी मदद से विक्रम उस तांत्रिक को मारकर अपने और बेताल के प्राणों की रक्षा करता है.

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