एक लड़के की छोटी सी मोटिवेशनल कहानी, टाइम निकाल कर जरूर पढ़ें

Motivational Story : एक 12 स्टैण्डर्ड का लड़का था| होशियार छात्र, उसने अपना एक गोल सेट किया था 98% का और उसने उस गोल के अनुसार उसने आगे की प्लानिंग की मैं यह कर लूंगा मैं वो करूंगा सारी प्लानिंग की| उसके रिजल्ट 96% आया पर उसने सुसाइड कर ली| और ऐसे एक उदाहरण नहीं
 
एक लड़के की छोटी सी मोटिवेशनल कहानी, टाइम निकाल कर जरूर पढ़ें

Motivational Story : एक 12 स्टैण्डर्ड का लड़का था| होशियार छात्र, उसने अपना एक गोल सेट किया था 98% का और उसने उस गोल के अनुसार उसने आगे की प्लानिंग की मैं यह कर लूंगा मैं वो करूंगा सारी प्लानिंग की| उसके रिजल्ट 96% आया पर उसने सुसाइड कर ली| और ऐसे एक उदाहरण नहीं है भारत में ऐसे हजारों उदाहरण है| नंबर कम आने की वजह से सुसाइड कर लेते हैं| लेकिन यह तो सिर्फ नंबर कम आने की वजह से था| कई इंसान है जो डिप्रेशन पीरियड के वजह से पेन के वजह से और कई रीजन है जिस वजह से लोग सुसाइड कर लेते हैं| पता नहीं कितने दिन की जिंदगी खराब हो रही है किस वजह से क्योंकि एक ट्रक पर नहीं चल रहा है|

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आप कल्पना करो क्या आप स्टेडियम में अकेले बैटिंग कर रहे हो कोई विकेटकीपर नहीं , कोई विकेट नहीं, ऐसे ही हमारी जिंदगी है जो एक के बाद एक बॉल फैंकी जा रही है|  बॉल आई और आपने बॉल को मिस कर दिया तो आप क्या सुसाइड करोगे? समझ में आई मेरी बात में क्या बोलना चाहता हूं| वैसे ही पेरेंट्स फेल होने होने कहते हैं कि

तो आप क्या करोगे

मर जा

यह जिंदगी से हार गया

तू कुछ नहीं कर सकता

किसी काम का नहीं है

तेरा कुछ नही हो सकता

ये कुछ नहीं कर पायेगा

क्या करू में इन इस लड़के का

क्या है लाइफ को समझो| आप सोच रहे हो उससे परे है| आप सोच सकते हो उससे परे है जिंदगी| एक बॉल छूट गई वह बोल क्या थी अपॉर्चुनिटी थी आपकी| जो 12 की एग्जाम ती जो अपॉर्चुनिटी के रूप में आ रही थी|

जो जिंदगी ने फेंकी थी अगर ये बॉल निकल गई तो आपकी जिंदगी या खत्म नहीं हो जाती है| सोचो इस बात को| मैं यह नहीं कहरा कि वह अपॉर्चुनिटी सही नहीं थी मान लिया किया नंबर अच्छे आते तो जिंदगी अच्छी हो जाती है|

लेकिन निकल भी गई तो क्या फर्क पड़ता है जिंदगी यहीं खत्म नहीं होती| मैंने आपको एक उदाहरण दिया था ऊपर की जिंदगी के खेल की तरह| यह वैसे यह आप तब तक निहार सकते है जब तक आप मैदान छोड़कर चले नहीं जाते|

दुनिया की कोई ताकत आपको हरा नहीं सकती अगर आप पीठ पर डटे रहो| बल का काम है वो एक के बाद एक बॉल पर जाएगी| जिंदगी के अलग अलग बॉल कभी फास्ट, कभी स्पिन, हजारों तरह फेकि जाएगी जिंदगी में|

यह बोल क्या है अपॉर्चुनिटी| एक बॉल निकल गई क्या फर्क पड़ता है| पिच पर डटे रहना है एक बॉल चली गई कोई बात नहीं दूसरे बारे में और बढ़िया करेंगे खेलो अपना ध्यान पिच की तरफ रखो लाइफ की तरफ रखो|

आप ऐसे कितने बॉल मिस कर लो लेकिन आप डटे हुए पिच पर इसकी अहमियत है| दो, 3, 5 बोल मिस हो जाए लेकिन आखरी के बोल मैं लेकिन आखरी के बोल मैं आप छक्का मार देते हो तो सॉरी कसर एक ही बार में पूरी| सारा समाप्त हो जाएगा बस 1 दिन के अंदर एक दिन समझ गए| जिंदगी भी एक खेल है| खेल की तरह मत लीजिए|ऐसा नहीं कि 1 छक्का मारा तो शांत बैठ गए एक छक्का 10 साल पहले मारा था अभी क्या कर रहे हो| बोल छोटे या छक्का मारे बस खेलते रहो| नेवर गिव उप.

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