जीवन में सफल होना हैं तो याद रखिये ये 4 बातें कभी नहीं होंगे असफल

आचार्य चाणक्य ने जीवन को सफलता पूर्वक जीने के लिए कई नीतियां बनाईं और चाणक्य नीति में उन्हें समाहित किया. आचार्य चाणक्य की ये नीतियां आज भी प्रासंगिक बनी हुई हैं. विष्णु गुप्त और कौटिल्य के नाम से मशहूर चाणक्य ने सफलता को लेकर चार ऐसी बातों का जिक्र किया है जिसका अनुसरण किया जाए
 
जीवन में सफल होना हैं तो याद रखिये ये 4 बातें कभी नहीं होंगे असफल

आचार्य चाणक्य ने जीवन को सफलता पूर्वक जीने के लिए कई नीतियां बनाईं और चाणक्य नीति में उन्हें समाहित किया. आचार्य चाणक्य की ये नीतियां आज भी प्रासंगिक बनी हुई हैं. विष्णु गुप्त और कौटिल्य के नाम से मशहूर चाणक्य ने सफलता को लेकर चार ऐसी बातों का जिक्र किया है जिसका अनुसरण किया जाए तो सफलता आपके कदम चूम सकती है. चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य अगर 4 बातें किसी से भी न बताए तो वो हर मोड़ पर जीत हासिल कर सकता है. 

जीवन में सफल होना हैं तो याद रखिये ये 4 बातें कभी नहीं होंगे असफल1. चाणक्य कहते हैं कि जीवन के किसी भी मोड़ पर पैसों की कमी होने पर अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में किसी और को नहीं बताना चाहिए. वो कहते हैं कि जीवन में ऐसे कई मौके आते हैं जब आप आर्थिक रूप से तंग हो जाते हैं और आपके पास पैसे नहीं होते. ऐसे समय में आपको खुद पर यकीन कर आगे बढ़ना चाहिए. अगर आप अपनी इस परेशानी के बारे में सभी को बताते हैं तो लोग उनका मजाक बनाना शुरू कर देते हैं. साथ ही मदद के लिए कोई भी आगे नहीं आता.

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  1. आचार्य चाणक्य कहते हैं कि हमें अपने घर की बातें घर तक ही सीमित रखनी चाहिए. जो लोग घर की छोटी-छोटी बातों को बाहर के लोगों से बताते हैं उन्हें कई प्रकार के दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. बाहर के लोग आपकी बातों को जानकर आपके खिलाफ षड्यंत्र करते हैं और घर में क्लेश पैदा करते हैं. वो कहते हैं कि पत्नी और पति के बीच की बातों को भी सीमित रखना चाहिए क्योंकि ये बातें दोनों के सम्मान और अपमान से जुड़ी होती हैं.

  2. हमारे जीवन में कई ऐसे पल आते हैं जब हमें अपमान सहना पड़ता है. चाणक्य कहते हैं कि अपमानित होने पर किसी और व्यक्ति से इसकी चर्चा नहीं करनी चाहिए. अपने अपमान को गुप्त रखना चाहिए. लोगों को बताने पर वो आपकी मदद करने की जगह आपका मजाक बनाते हैं, इससे आपका मनोबल टूट जाता है.

  3. अपने दुख-दर्द को दूसरों से साझा करते ही हम खुद का नुकसान कर देते हैं. ऐसा कहना है आचार्य चाणक्य का. वो कहते हैं कि दूसरों के पास आपके दुख, दर्द को समझने का समय नहीं होता है. ऐसे में आपको अपनी दुख की स्थिति के बारे में उन्हीं लोगों से चर्चा करनी चाहिए जिन पर आपको पूर्ण रूप से विश्वास हो.

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