पत्थरो का यह ढांचा दुनिया के सबसे बड़े रहस्यों में से एक

सहारा रेगिस्तान में पत्थरों से बना खगोल शास्त्र और ज्योतिष से जुड़ा ढांचा सुदूर रेगिस्तान न जाने कितने ही अनजाने रहस्यों से भरा हुआ है . ऐसा ही एक अजीब सा रहस्य है सुदूर के रेगिस्तान में बना हुआ पत्थरों का ढांचा. यह ढांचा दुनिया के सबसे ढांचा दुनिया के सबसे बड़े रहस्यों में से
 
पत्थरो का यह ढांचा दुनिया के सबसे बड़े रहस्यों में से एक

सहारा रेगिस्तान में पत्थरों से बना खगोल शास्त्र और ज्योतिष से जुड़ा ढांचा

सुदूर रेगिस्तान न जाने कितने ही अनजाने रहस्यों  से भरा हुआ है . ऐसा ही एक अजीब सा रहस्य है सुदूर के रेगिस्तान में बना हुआ पत्थरों का ढांचा. यह ढांचा दुनिया के सबसे ढांचा दुनिया के सबसे बड़े रहस्यों में से एक गिना जाता है. 1973 में पुरातत्व विभाग के अनुभवी लोग जब पहली बार यहां पहुंचे थे तब वह सभी चक्कर में पड़ गए आखिर यह क्या बला है.  ठीक पच्चीस वर्ष बाद 1998 में प्रोफेसर फ्रेड वैंडोर्फ के सभी सदस्यों  ने पत्थरों के इस ढांचे का गहरा अध्ययन किया तो वो भी अचरच में पड़ गए तब उन्हें यह पता चला कि यह तकरीबन  6000 साल ईसा पूर्व में इसे बनाया गया था ।

नाब्टा प्लाया में मिले पत्थर के स्ट्रक्चर पर रिसर्च करने से पता चला है की यह कोई मामूली ढांचा नहीं बल्कि यह खगोल शास्त्र और ज्योतिष से जुड़ा हुआ है. उनके दिमाग में सिर्फ यह सवाल था  कि इतनी 6000 साल ईसा पूर्व पहले उन लोगों ने इतना विकास कैसे कर लिया गया था। और वह इस ढांचे का प्रयोग किस चीज़ के लिए करते थे. क्या वह इससे समय देखा करते थे , यह आजतक भी एक अंधे कुए में मेंडक पकड़ने जैसा है. यह रहस्य अब ही पुरातत्व विभाग के लिए एक पहेली , एक अन सुलझा रहस्य बना हुआ है.

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