मुर्दे में भी जान फूंक देती है ये बेल, संजीवनी बूटी से है कई गुना ज्यादा ताकतवर होती है देखें

आयुर्वेद में बहुत सारी जड़ी बूटियों का वर्णन किया गया है जो मनुष्य के भयंकर रोगों को नष्ट करती हैं। आज हम आपको एक ऐसी बेल के बारे में बताएंगे जो हमारे शरीर में उत्पन्न भयंकर बीमारियों को चंद समय में ही नष्ट कर शरीर को एकदम स्वस्थ बना देती है। इस बेल के सभी
 
मुर्दे में भी जान फूंक देती है ये बेल, संजीवनी बूटी से है कई गुना ज्यादा ताकतवर होती है देखें

आयुर्वेद में बहुत सारी जड़ी बूटियों का वर्णन किया गया है जो मनुष्य के भयंकर रोगों को नष्ट करती हैं। आज हम आपको एक ऐसी बेल के बारे में बताएंगे जो हमारे शरीर में उत्पन्न भयंकर बीमारियों को चंद समय में ही नष्ट कर शरीर को एकदम स्वस्थ बना देती है। इस बेल के सभी भाग जैसे – जड़, पत्ती, फूल और बीज आदि सभी भाग काम के होते हैं। इस बेल का नाम इन्द्रायण है इसे गडुम्बा भी कहते हैं । ये बेल किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। आइए जानते हैं इसके चमत्कारी आयुर्वेदिक गुणों के बारे में –

मुर्दे में भी जान फूंक देती है ये बेल, संजीवनी बूटी से है कई गुना ज्यादा ताकतवर होती है देखें

  1. इन्द्रायण के बीजो का तेल नारियल के तेल में मिलकर सिर में नित्य मालिश करने से सफ़ेद बाल काले हो जाते है।

  2. पीलिया रोग में इन्द्रायण की जड़ का चूर्ण गुड़ के साथ इस्तेमाल करने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है ।

  3. मधुमेह में सुगर लेवल बढ़ने पर इन्द्रायण के 5 से 7 फलों को पैरो से नित्य 10 मिनट तक कुचले , इससे बढ़ी हुई शुगर अपने स्तर पर आजाती है । यह प्रयोग मधुमेह में काफी लाभ देता है ।

मुर्दे में भी जान फूंक देती है ये बेल, संजीवनी बूटी से है कई गुना ज्यादा ताकतवर होती है देखें

  1. मिर्गी में इन्द्रायण की जड़ का नश्य देने से मिर्गी रोग में काफी लाभ मिलता है ।

  2. अगर आपको खांसी कई दिनों से है और ठीक नहीं रही है तो इन्द्रायण के पक्के फल में 10 – 15 कालीमिर्च भर दे और धुप में रख दे । रोज एक कालीमिर्च – पिप्पली और शहद के साथ मिलाकर सेवन करे । कैसी भी कफज खांसी हो ठीक हो जाती है ।

  3. इन्द्रायण की जड़ को पिसकर इसे हल्का गरम करके सुजन वाली जगह बाँधने से सुजन जल्दी ही ठीक हो जाती है ।

  4. कब्ज की समस्या में इन्द्रायण की जड़ का चूर्ण 1 ग्राम की मात्रा में गुड के साथ सेवन करे , कब्ज खत्म हो जाएगी।

  5. सिरदर्द में इन्द्रायण की जड़ को तील के तेल में पक्का ले । इस तेल की मस्तक पर मालिश करने से सिरदर्द की समस्या जाती रहती है ।

  6. फोड़े फुंसियो में इन्द्रायण (गड़तुम्बा) की जड़ को पिस कर इसका लेप प्रभावित स्थान पर करने से फोड़े फुन्सिया बैठ जाती है ।

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