जाने रिजेनरेटिव सैल थेरेपी किसके लिए लाभदायक है?

जोड़ों का दर्द आजकल के युवाओं के बीच एक क्रॉनिक समस्या है और इसके होने के कई कारण हो सकते हैं जेसे कठिन शारीरिक कार्य, चोट, दर्दनाक दुर्घटना या गतिहीन जीवनशैली। फिलहाल, जोड़ों के दर्द की रोकथाम के लिए ऐसे व्यक्तियों को पेनकिलर्स और फीजियोथेरेपी जैसे अस्थायी उपायों की सलाह दी जाती है। क्योंकि 55
 
जाने रिजेनरेटिव सैल थेरेपी किसके लिए लाभदायक है?

जोड़ों का दर्द आजकल के युवाओं के बीच एक क्रॉनिक समस्या है और इसके होने के कई कारण हो सकते हैं जेसे कठिन शारीरिक कार्य, चोट, दर्दनाक दुर्घटना या गतिहीन जीवनशैली। फिलहाल, जोड़ों के दर्द की रोकथाम के लिए ऐसे व्यक्तियों को पेनकिलर्स और फीजियोथेरेपी जैसे अस्थायी उपायों की सलाह दी जाती है। क्योंकि 55 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को ‘नी या हिप्स रिप्लेसेमेंट’ (घुटने और कूल्हों के जोड़ो की सर्जरी) की सलहा नहीं दी जाती है। फिर भी, अगर निदान से आरंभिक चरण के टिशु डैमेज (कोशिकाओं के नुकसान) का पता चलता है। तो ऐसे लोगों में ऑस्टियोआर्थराइटिस विकसित होने का खतरा रहता है।। अब आरएमएस रिग्रो की ओर से रिजेनरेटिव सैल थेरेपी के साथ, ऐसे मरीज अपनी कार्टिलेज और हड्डियों की समस्याओं के लिए प्राकृतिक और स्थायी समाधान पा सकते हैं।

कार्टिलेज सैल थेरेपी

जाने रिजेनरेटिव सैल थेरेपी किसके लिए लाभदायक है?

कार्टि शरीर के सभी जोड़ों में जैसे घुटने, कूल्हे, कंधे आदि में मौजूद मुलायम कोशिका है। एक बार कार्टिलेज का क्षति पहुंचने पर नुकासान की संभावना रहती है। इससे कार्टिलेज को स्थायी की जरूरत पड़ सकती है और भविष्य में ‘नी रिप्लेसमेंट’ के लिए, कार्टिलेज टिशु के एक छोटे टुकड़े को काटकर आरएमएस रिग्रो प्रयोगशाला भेजा जाता है। 3 सप्ताह में मरीज की विशिष्ट कोशिकाओं को कल्चर किया जाता है और इम्प्लांटेशन के लिए वापस भेजा जाता है। जिससे टिशु दोबारा बनने लगता है और मरीज अपनी सक्रिय जीवनशैली जैसे स्पोर्ट्स में वापस जा सकता है।

बोन सैल थेरेपी

जाने रिजेनरेटिव सैल थेरेपी किसके लिए लाभदायक है?

एवास्क्यूलर नेक्रोसिस से हड्डियां घिसने लगती है जिससे अक्सर कूल्हे की जरूरत पड़ती है। मरीज की हड्डी का जोड़ टूट सकता है। और ‘‘हिप रिप्लेसमेंट’ सर्जरी की जरूरत पड़ती है। मरीज की हड्डी को दोबारा बनाने के लिए, मरीज के तरल की कुछ मात्रा निकाली जाती है और हड्डी की कोशिकाओं को विशिष्ट प्रकार से तैयार करने के लिए आरएमएस रिग्रो जीएमपी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में 4 सप्ताह तक कल्चर किया जाता है। इप्लांटेशन के बाद, यह कोशिकाएं नई तीन आयामी हड्डियां बनाती है। जिसके परिणामस्वरूप मरीज को दर्द से राहत मिलती है।

यह जानना बहुत जरूरी हे कि इन दो प्रक्रियाओं की सलाह उन मरीजों को नहीं दी जाती जिन्हें कार्टिलेज और हड्डी की अपरिवर्तनीय क्षति है। 65 वर्ष से ज्यादा उम्र के अधिकतर मरीजों को जॉइंट रिप्लेमेंट सर्जरी की जरूरत पड़ती है। जिनरेटिव सैल थेरेपी आपके लिए अनुकूल है या नहीं, जानने के अपने नजदीकी किसी बड़े हॉस्पीटल जैसे अपोलो में संपर्क करें। क्योंकि इस तरह के इलाज वहीं किये जाते हैं।

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