अपने शिशु की अच्छी देखभाल के लिए इन टिप्स को करें फॉलो

शिशु की देखभाल करना बहुत जरूरी चीज होती है। आप जितनी अच्छी तरह अपने शिशु की देखभाल का खयाल रखेंगे, आपका शिशु उतना ही हेल्दी रहेगा। शिशु को हेल्दी बनाए रखने के लिए अच्छी देखभाल की जरूरत है जिससे वो बीमारियों से बचा रहे और स्वस्थ रहे। तो आईए जानते हैं। अगर शिशु ज्यादा रोए
 
अपने शिशु की अच्छी देखभाल के लिए इन टिप्स को करें फॉलो

शिशु की देखभाल करना बहुत जरूरी चीज होती है। आप जितनी अच्छी तरह अपने शिशु की देखभाल का खयाल रखेंगे, आपका शिशु उतना ही हेल्दी रहेगा। शिशु को हेल्दी बनाए रखने के लिए अच्छी देखभाल की जरूरत है जिससे वो बीमारियों से बचा रहे और स्वस्थ रहे। तो आईए जानते हैं।

अगर शिशु ज्यादा रोए तो

वैसे तो नवजात शिशु का रोना कोई चिंता की बात नहीं है। अक्सर छोटे बच्चे बिस्तर पर पेशाब करने पर या भूख लगने पर रोते हैं। अगर आपका शिशु हर समय रोता रहता है तो उसे डॉक्टर को एक बार जरूर दिखाएं।

शिशु के शरीर को ढककर रखें

इस बात का ध्यान रखें कि नवजात शिशु के शरीर को खुला न रखें, उसे हमेशा ढककर रखना चाहिए क्योंकि छोटे बच्चे का शरीर बाहरी तापमान को ज्यादा सहन नहीं कर पाता जिस कारण उसे स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि शिशु को हमेशा ढककर ही रखें।

शिशु की मालिश करें

शिशु के शरीर की मालिश करना बेहद जरूरी होता है। इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि इससे बच्चे की हड्डियां मजबूत बनती हैं। ये आपके शिशु के लिए जरूरी होता है। बच्चे के जन्म के लगभग 10 दिन बाद आप शिशु की मालिश कर सकती हैं। मालिश के लिए बादाम के तेल का इस्तेमाल सबसे बेहतर होता है।

शिशु को सिर्फ मां का दूध ही पिलाएं

इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि बच्चे को सिर्फ मां का दूध पिलाना ही सबसे बेहतर है। इसका फायदा ये होता है कि मां के दूध में कोलेस्ट्रोम नामक पदार्थ पाया जाता है और ये पदार्थ शिशु की सेहत के लिए बेहद जरूरी होता है। ये आपके शिशु को आने वाले समय में बीमारियों से भी बचाता है। ध्यान रखें कि शिशु के लिए मां का दूध ही सबसे अच्छा है।

शिशु के खान-पान पर ध्यान दें

अभी हमने आपको ऊपर बताया था कि कम से कम 6 महीने से पहले शिशु को कुछ भी ठोस आहार न दें। शिशु को 6 महीने सिर्फ मां का दूध ही पिलाएं। अगर आप चाहें तो 6 महीने के बाद आप अपने शिशु को ठोस आहार भी दे सकती हैं लेकिन, इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि शिशु को ऐसा कोई भी ठोस आहार न दें जिसे वो आसानी से न पचा पाए।

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