आयुर्वेद फार्मूले फीफाट्रोल से डेंगू पर नियंत्रण संभव: बीएचयू

 
BHU Ayurveda Medicine on Dengu fever 

नई दिल्ली, 26 सितंबर। आयुर्वेद के परंपरागत फार्मूलों पर शोध के बाद तैयार की गई दवा फीफाट्रोल वायरस जनित बीमारियों को काबू करने में कारगर पाई गई है। इस दवा पर लंबे समय से कार्य कर रहे बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के आयुर्वेद विभाग के प्रोफेसर डॉ. के. एन. द्विवेदी ने कहा कि डेंगू के उपचार में भी इसके बेहतरीन परिणाम देखे गए हैं।

द्विवेदी ने कहा कि डेंगू या कोरोना जैसे वायरस से निपटने की कोई आधुनिक दवा उपलब्ध नहीं है। लेकिन आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियां हैं जो व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर वायरस और बैक्टीरिया के संक्रमण से बचाती हैं। साथ ही संक्रमण होने की स्थिति में उसे ज्यादा बढ़ने नहीं देती हैं जिससे बीमारी नियंत्रण में रहती है। ये दवाएं संक्रमण को जल्दी खत्म भी कर देती हैं।

उन्होंने कहा कि फीफाट्रोल में पांच औषधियां सुदर्शन वटी, संजीवनी बटी, गोदांती भस्म, त्रिभुवन कीर्ति रस और मृत्युंजय रस प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, बुखार को काबू में करने व वायरस संक्रमण के शरीर पर घातक प्रभावों को कम करने में कारगर हैं। इसमें आठ अन्य बूटियों तुलसी, कुटकी, चिरायता, मोथा, गिलोय, दारुहल्दी, करंज, अपामार्ग के भी विशेष औषधीय गुण हैं। जैसे अपामार्ग और करंज वायरस के जहरीले प्रभावों को निष्क्रिय करते हैं। कुटकी लीवर को ठीक करती है। तुलसी और गोदांती भस्म में एंटी वायरल गुण हैं। यह वायरस के प्रभाव को खत्म करती है। त्रिभुवन कीर्ति रस जुकाम को कम करता है। संजीवन वटी से पसीना निकलता है जिससे शरीर का तापमान गिरता है।

BHU Ayurveda Medicine on Dengu fever 

इसमें पूर्व एम्स भोपाल ने फीफाट्रोल को लेकर अपने अध्ययन में दावा किया था कि यह आयुर्वेद की एंटीबायोटिक दवा है जिसमें बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण को नियंत्रण करने के गुण हैं। नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) के डॉक्टरों ने भी फीफाट्रोल दवा के जरिए संक्रमित मरीज में असर पाया था जिसे जर्नल ऑफ आयुर्वेद केस रिपोर्ट में प्रकाशित किया था। एमिल फार्मास्युटिकल द्वारा इस दवा को लंबे शोध के बाद तैयार किया गया है।

डॉ. द्विवेदी ने कहा कि डेंगू के मरीजों में इस दवा का असर देखा गया है। आजकल फैले डेंगू सिरोटाइप-2 में भी यह दवा कारगर निकलेगी। सिरोटाइप-2 डेंगू का चार वेरिएंट में सबसे खतरनाक माना जाता है। इसलिए आयुर्वेद के फार्मूले से इसके खतरे को न्यूनतम किया जा सकता है।

 

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