क्या आप जानते हैं कुमकुम को किस तरह से तैयार किया जाता है, जाने एक बहुत ही सरल विधि

कुमकुम एक ऐसी चीज है जिसे हल्दी और चूने को मिलाकर बनाया जाता है चुनी को पानी में घोलकर रख दें तथा उसमें आवश्यकतानुसार हल्दी मिला लें फिर से सूखने के लिए रख देते हैं और जब यह जम जाता है तो इसको छोटे-छोटे टुकड़ों में पीस लेते हैं वे चूर्ण बना लेते हैं यह
 

कुमकुम एक ऐसी चीज है जिसे हल्दी और चूने को मिलाकर बनाया जाता है चुनी को पानी में घोलकर रख दें तथा उसमें आवश्यकतानुसार हल्दी मिला लें फिर से सूखने के लिए रख देते हैं और जब यह जम जाता है तो इसको छोटे-छोटे टुकड़ों में पीस लेते हैं वे चूर्ण बना लेते हैं यह एक बहुत ही सरल विधि है इसे कुमकुम तैयार होता हैबाजार में जो कुमकुम मिलता है उसमें सुहागा पारा तथा हानिकारक केमिकल्स मिलाए जाते हैं आजकल शुद्ध कुमकुम का मिलना बहुत ही मुश्किल है इसी महिलाएं अपनी मांग में सिंदूर भर्ती है यह केमिकल्स बहुत ही नुकसानदायक होते हैं जो स्किन के लिए विभिन्न प्रकार के रोग पैदा कर सकते हैं कई महिलाओं को तो इससे एनर्जी तक हो जाती है इसलिए ध्यान रहे कि हमेशा शब्द कुमकुम का प्रयोग ही करना चाहिए इसका उपयोग तिलक करने के लिए सभी देवी देवताओं को चढ़ाने के लिए किया जाता है यह मां भगवती दुर्गा को अत्यंत प्रिय है साथ ही गणेश जी को भी यह पसंद है जो मां दुर्गा के चरणों में पड़े हुए कुमकुम का प्रतिदिन तिलक करता है उसे हर जगह विजय प्राप्त होती है किसी भी परीक्षा में सफल होने के लिए मां दुर्गा के चरणों से कुमकुम का 21 दिनों तक दिनों तिलक करना चाहिए कुमकुम का हर लाल रंग वीर भाग को दर्शाता है जब युद्ध लड़ने जाते थे तब राजपूत इस कुमकुम का तिलक करते थे जो युद्ध की विजय का सूचक है

इसीलिए शुभ कार्यों में तिलक करना अत्यंत ही शुभ होता है कुमकुम के बारे में एक और बात हम आपको बताने जा रहे हैं कि आपके घर में श्रीयंत्र तो होगा ही उस पर कुमकुम का अभिषेक किया जाता है श्री चक्र को हल्दी दूध दही घी शहद कुमकुम मिश्रित जल से भी अभिषेक किया जाता है इससे धनसंपदा की वृद्धि होती है इससे देवी महालक्ष्मी अत्यंत ही प्रसन्न होती है हमारे दोनों भ्रुकुटी के बीच का जो स्थान होता है वह बहुत ही संवेदनशील होता है इसीलिए महिलाओं को यहां पर बिंदी लगाने का प्रावधान किया गया है प्राचीन काल में भारतीय परंपराओं को बनाने वाले लोग बहुत ही बुद्धिमान थे इस कारण बिंदी के ठीक ऊपर माथे पर कुमकुम लगाने की व्यवस्था की गई थी यह शादीशुदा होने का प्रतीक भी है कुमकुम की बिंदी लगाने पर या इसका लंबा तिलक करने पर वह संवेदनशील स्थान सुरक्षित रहता है तथा हमारा ध्यान वहां पर टिका रहता है इसलिए एकाग्रता में वृद्धि होती है हमारा ध्यान भटकने से बचाव होता है उसी स्थान पर ऊर्जा एकत्र होने लगती है इसीलिए मां भगवती जगदंबा के उपासक नित्य ही कुमकुम का तिलक करते हैं यह शक्ति संप्रदाय में अत्यंत ही प्रचलित है

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