तुलसी देवी के 3 मंत्र के बारे में सुना है आपने जानिए, 3 मंत्र क्या है

सभी देवी देवताओं के मंत्र तो सुने होंगे पर क्या कभी तुलसी देवी के मंत्र के बारे में सुना है जिन्होंने सुना है तो अच्छा है ओम श्री महालक्ष्मी नमः अथवा ओम सुभद्रा नमः या फिर ओम सुप्रभा नमः यह तुलसी देवी के तीन मंत्रा है आप तुलसी के सामने दीपक रखते समय इन तीनों
 

सभी देवी देवताओं के मंत्र तो सुने होंगे पर क्या कभी तुलसी देवी के मंत्र के बारे में सुना है जिन्होंने सुना है तो अच्छा है ओम श्री महालक्ष्मी नमः अथवा ओम सुभद्रा नमः या फिर ओम सुप्रभा नमः यह तुलसी देवी के तीन मंत्रा है आप तुलसी के सामने दीपक रखते समय इन तीनों में से किसी भी मंत्र का जाप कर सकते हैं इसी 108 बार रोज जहां पर किया जाना चाहिए इससे घर में सुख शांति का वातावरण रहता है वह कल है नहीं होती है धनसंपदा की बरसात मां लक्ष्मी सदैव ही करती रहती है महालक्ष्मी श्री नारायण के साथ उस घर में सदा ही विराजमान रहती है इससे आपकी तन मन को असीम शांति का अनुभव होगा तुलसी देवी को प्रणाम करके इस मंत्र का जप करते हुए तुलसी पत्र को तोड़ना चाहिए शास्त्रों के अनुसार यह नहीं बोला जाता है तो दोष लगता है हमारे हिंदू धर्म के प्राचीन ग्रंथों में ऐसे ही अनेकों ज्ञान विज्ञान की बातें हैं प्रत्येक प्राणी को यह बातें जानना आवश्यक है तभी हमारी गौरवशाली परंपरा का ज्ञान हो सकता है यह तो सब को पता है कि तुलसी दिन और रात दोनों समय ऑक्सीजन देती रहती है इसीलिए इसी पूजनीय बनाया गया है तुलसी विवाह जैसी परंपरा का शुभारंभ किया गया है आप सभी तुलसी के कितने प्रकार उनके बारे में जानती होंगी पर तुलसी अनेकों प्रकार की होती है कुछ हमारी साधारण घर में पाई जाती है कुछ घने जंगलों में मिलती है

जो तुलसी घने वनों में पहाड़ों में पाई जाती है उसको वन तुलसी कहते हैं यह बहुत ही ऑक्सीजन देती है पहाड़ों पर रहने वाले लोग इसका उपयोग करते हैं एक श्यामा तुलसी होती है यह सर्वाधिक श्रेष्ठ मानी जाती है क्योंकि यह भगवान श्री कृष्ण को अत्यंत प्रिय है इसको कृष्णा तुलसी भी कहा जाता है एक दूसरी तुलसी होती है जिसे राम तुलसी कहते हैं यह भगवान राम को प्रिय है एक बहुत ही जरूरी चीज जो जानने योग्य है वह यह है कि कभी गणेश जी को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है और मां दुर्गा को भी तुलसी पत्र देना हानिकारक सिद्ध होता है सभी देवताओं के अपने-अपने गुणधर्म होते हैं इन गुणधर्म के अनुसार ही पूजा प्रणाली विकसित की गई है इसीलिए सिर्फ शालिग्राम पर ही तुलसी पत्र से पूजा की जाती है भगवान शिव की पूजा में भी तुलसी का उपयोग नहीं की जाती किया जाता है इसे ही वैष्णवी लोगों ने विकसित किया था तो इस पर वैष्णव परंपरा का ही हक है तुलसी की लकड़ी की माला बहुत ही पॉजिटिव एनर्जी का संचार करती है इसे गली में हाथ में धारण किया जा सकता है हमारी दादी नानी तुलसी की एक माला बच्चों को पुराने समय में जरूर है उपहार के रूप में दिया करती थी परंतु आज के समय में ऐसी नीतियों का लोप हो गया है

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