जुकाम-बुखार के साथ खांसी

आयुर्वेद आयुर्वेद के अनुसार, जब कफ सूखकर फेफड़ों और श्वसन अंगों पर जम जाता है तो खांसी होती है। इसके लिए नीचे लिखे तरीकों में से कोई एक करें। इन दवाओं और नुस्खों को बीपी या दिल के मरीज भी अपना सकते हैं, पर डायबीटीज के मरीज सितोपलादि चूर्ण और कंठकारी अवलेह न लें क्योंकि
 
जुकाम-बुखार के साथ खांसी

आयुर्वेद
आयुर्वेद के अनुसार, जब कफ सूखकर फेफड़ों और श्वसन अंगों पर जम जाता है तो खांसी होती है। इसके लिए नीचे लिखे तरीकों में से कोई एक करें। इन दवाओं और नुस्खों को बीपी या दिल के मरीज भी अपना सकते हैं, पर डायबीटीज के मरीज सितोपलादि चूर्ण और कंठकारी अवलेह न लें क्योंकि उनमें मीठा होता है।

महालक्ष्मी विलास रस या त्रिभुवन कीर्ति रस की एक-एक गोली दो बार लें।
संजीवनी वटी एक गोली दिन में दो बार लें।
नागवल्लभ रस की एक गोली दिन में तीन बार पान के पत्ते में लपेटकर या आधा चम्मच अदरक के रस के साथ लें।
कफकेतु रस की एक गोली को आधा चम्मच अदरक के रस से दिन में दो बार लें।
लसूड़े को बीज समेत बिना घी के थोड़ा-सा भूनकर उसमें आधा चम्मच सौंठ, दो लौंग और चौथाई चम्मच दालचीनी मिलाकर पानी में उबालकर चीनी डालकर शर्बत बना लें। इसे दिन में दो-तीन बार लें।
एक बताशे में एक काली मिर्च डालकर चबा लें। इस तरह दिन में एक बार तीन-चार बताशे खाएं।

नोट : सभी दवाएं किसी वैद्य की देखरेख में लें।
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