पहाड़ियों के बीच घटी एक ऐसी घटना जो 2 जन्मों की साक्षी है, जाने एक अद्भुत रहस्य

पहाड़ियों के बीच घटी एक ऐसी घटना जो 2 जन्मों की साक्षी थी । पहाड़ियों के बीचो बीच एक अनुपम नगर था उस नगर में एक ब्राह्मण परिवार के यहां एक बालक का जन्म हुआ| वह बालक बहुत ही शक्तियों को साथ लेकर जन्मा था, मां भगवती का शरीर पर चिन्ह बना हुआ था हर
 
पहाड़ियों के बीच घटी एक ऐसी घटना जो 2 जन्मों की साक्षी है, जाने एक अद्भुत रहस्य

पहाड़ियों के बीच घटी एक ऐसी घटना जो 2 जन्मों की साक्षी थी । पहाड़ियों के बीचो बीच एक अनुपम नगर था उस नगर में एक ब्राह्मण परिवार के यहां एक बालक का जन्म हुआ| वह बालक बहुत ही शक्तियों को साथ लेकर जन्मा था, मां भगवती का शरीर पर चिन्ह बना हुआ था हर एक व्यक्ति उस बालक के जन्म को लेकर अति प्रसन्नता था । बालक खेलता कूदता सब को बहुत अच्छा लगता था । माता-पिता खेल-खेल में उससे पूछते बेटा क्या बनेगा तो वह कहता मैं पहाड़ियों में जाऊंगा, परंतु इस बात को किसी ने भी गंभीरता से नहीं लिया, धीरे-धीरे बालक बड़ा होता गया और समय गुजरता गया जैसे ही बालक 15 वर्ष का हुआ अचानक ही सभी ने देखा बालक के चारों ओर एक अजीब सी शक्ति का संचार हो रहा है ;और वह वालक उठा और उठ कर चलने लगा सभी लोग उस बालक के पीछे पीछे चल दिए ,जो भी उसे रोकने का प्रयास करता था वह स्वयं ही पीछे हट जाता था | बालक के पिता भी साथ में चल रहे थे ,बालक आगे चल रहा था बाकी सभी पीछे चल रहे थे, बालक 2 दिन में एक पहाड़ी के करीब पहुंचा; और बालक ने वहां से एक पत्थर को उठाया कुछ मंत्रों का उच्चारण किया और बालक ने पत्थर को जैसे ही पृथ्वी पर रखा की पहाड़ियों के बीच से एक रास्ता खुल गया, उसी रास्ते पर बालक आगे चल दिया बाकी सभी लोग पीछे पीछे चलने लगे निर्भय चलते हुए बालों को देख कर चलने वाले लोगों ने देखा यह बालक निर्भयता से आगे बढ़ता चला जा रहा है क्या यह कोई असीम शक्ति है,सभी लोग आपस में चर्चा कर रहे थे, लेकिन जैसे ही बालक ने उस पहाड़ी के मार्ग को पार किया तो क्या देखा आगे एक नदी है और नदी को पार करने के लिए एक लकड़ी का बना हुआ पुल है

उस पुल के ऊपर से बालक निर्भयता से चलता चला जा रहा था उस बालक के पीछे हर एक व्यक्ति धीरे-धीरे चलने लगा बालक ने जैसे ही पुल को पार किया दूसरी ओर पहाड़ी पर पहुंचा और झुककर प्रणाम कर जय जय कार करने लगा सभी लोग असमंजस की स्थिति में हैं विचार कर रहे हैं यह बालक जय जयकार कर रहा है अवश्य ही कोई ईश्वर अंश है, जिसके कारण यह बालक यहां तक पहुंच गया और निर्भयता से यह आगे बढ़ता चला जा रहा है| हे प्रभु कोई भी संकट हम लोगों पर ना आए और वह बालक आगे बढ़ता चला जा रहा है कुछ 1 किलोमीटर दूर निकलने पर देखा जहां आने जाने वाले व्यक्ति के लिए रास्ता नहीं हैं वहां पर कुछ अग्नि मसाले जल रही हैं

गुफा की ओर सभी बड़े और अंदर जाकर देखा एक महात्मा जी उस गुफा के भीतर मां काली की प्रतिमा के आगे खड़े हैं |मां काली शिव जी के ऊपर पैर रखी हुई हैं , हाथ में खप्पर जिसमें अग्नि प्रज्वलित है| गले में मुंडो की माला धारण किए हुए हैं एक बहुत ही चमकती हुई मणियों का हार भी मैया के गले में हैं और मैया की प्रतिमा के आगे एक महात्मा एक चादर ओढ़े मां भगवती की आराधना में लगे हुए हैं; वह बालक उन्हीं महात्मा के पास जाकर उनको प्रणाम करता है ; जैसे ही उस बालक को महात्मा जी देखते हैं उसे अपने हृदय से लगाते हैं और मां भगवती को बारंबार प्रणाम करते उनका धन्यवाद करते हैं उनकी जय-जयकार करते हैं और देख देख कर रोने लगते हैं बालक को चुमते हैं हृदय से लगाते हैं फिर देखते हैं फिर उसे चूमते हैं ऐसा देख बालक के जो पिता थे वह चकित होकर उस महात्मा से पूछते हैं; हे महात्मा जी आप मेरे इस बालक को इस तरीके से क्यों अपने हृदय से लगाए हुए हैं क्या आप मेरे बेटे को जानते हैं या इसके पीछे कोई रहस्य है महात्मा जी ने उनकी ओर देखा और जो लोग साथ गए थे उन सभी की ओर देखा और एक गहरी सांस ली और उन्होंने बताना आरंभ किया श्रीमान यह जो बालक है पूर्व जन्म में यह मेरा बालक था और सुनो पुरानी बात है २००0 साल पहले मां काली स्वयं यहा चल कर आयी थी

मां भगवती की सेवा का आदेश हमारे परिवार को राजा ने दिया और हमारा परिवार यहां कई पीढ़ियों से मां काली की सेवा में रत है उसके पश्चात बहुत राजा बदले कयी हमारी पीढ़ियां भी बदली पर मेरे समय मै एक राजा हुए जो बहुत ही क्रूर थे उनको मालूम हुआ हमारी पहाड़ी के मंदिर मे मणियों का हार है जो बहुत ही शक्तिशाली है जिसे धारण करने वाला व्यक्ति किसी भी युद्ध में पराजित नहीं हो सकता है | इसलिए राजा ने अपने दूतों को मेरा पीछा करने का आदेश दिया परंतु राजा के दूत आते और मुख्य पहाड़ी वाले दरवाजे पर रुक जाते थे परंतु उसको खोलने के मंत्र या तो मैं जानता था या मेरा परिवार और उस दरवाजे को बिना मंत्र के खोला नहीं जा सकता इसीलिए राजा ने मुझे बहुत ही कष्ट दिया बहुत सारी परेशानियां दी परंतु उसका कोई भी प्रयास सफल नहीं हुआ तो उसने मेरे 15 वर्ष के पुत्र को लालच दिया और वह उसे लेकर यहां पहुंचे मेरे बेटे ने मुख्य दरवाजे को खोल दिया| लेकिन वह भीतर आ रहे थे उसी वक्त उन्होंने विचार किया यह बालक हमारे अब किसी काम का नहीं उनको नहीं मालूम था कि जो दरवाजे को खोलेगा वही बाहर निकाल सकता है| लेकिन उन्होंने दया ना दिखाते हुए मेरे बालक को नदी में फेंक दिया और मंदिर में आकर तोड़फोड़ कर दी और मां भगवती का मणियों वाला हार लेकर वह जाने लगे तो पता चला कि वह दरवाजा फिर से बंद हो गया उन्होंने कई प्रयास किए पर्वत बाला दरवाजा नहीं खुला तो उन्होंने प्रयास किया क्यों ना इसी पुजारी से इस गेट को खुलवाया जाए और उन्होंने जैसे ही मुझे पकड़ने के लिए सैनिकों को भेजा मुझे सैनिक पकड़ने आई रहे थे कि उसी समय नदियों का जल तूफान में बदल गया और राजा सहित सभी के सभी सैनिक नदी में बह गए और मणियों का हार मां काली के गले में पहुंच गया मैं यह सब देखकर बहुत ही विलाप कर रहा था रो रहा था उसी समय पर मां भगवती की प्रतिमा से आवाज आई हे प्रिय भक्त परेशान मत हो सही 15 वर्ष बाद आपका बालक पुनः यहां पर मेरी सेवा में लौटेगा| उसी बालक के द्वारा सेवा स्वीकार करूंगी और आज वह समय पूरा हो गया मेरा बालक फिर पुनः मां भगवती के सेवा में लौट कर आ गया है ; शहर के लोगों ने मां भगवती को बारंबार प्रणाम किया और वापस लौट गए |

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