अजब : आजीविका चलाने के लिए यहां भाई-पिता लाते हैं बेटी-बहनों के लिए ग्राहक

आप सभी जानते हैं कि भारत में वेश्यावृत्ति गैरकानूनी है। सरकारों ने वक्त-वक्त पर इसे खत्म करने के लिए कई कार्यक्रम चलाए गय दुख की बात ये है कि देश के कुछ हिस्सों में आज भी यह काम सिर्फ परंपरा के नाम पर अंजाम दिया जा रहा है। यहां बात के नीमच-मंदसौर और रतलाम जिलों
 
अजब : आजीविका चलाने के लिए यहां भाई-पिता लाते हैं बेटी-बहनों के लिए ग्राहक

आप सभी जानते हैं कि भारत में वेश्यावृत्ति गैरकानूनी है। सरकारों ने वक्त-वक्त पर इसे खत्म करने के लिए कई कार्यक्रम चलाए गय दुख की बात ये है कि देश के कुछ हिस्सों में आज भी यह काम सिर्फ परंपरा के नाम पर अंजाम दिया जा रहा है। यहां बात के नीमच-मंदसौर और रतलाम जिलों की।

इस क्षेत्र में बांछड़ा समुदाय कई साल से वेश्यावृति का धंधा कर रहा है। हैरानी की बात ये है कि इस समुदाय के लोगों के लिए यह घृणित परंपरा इतनी आम है कि वो लड़कियों को इस धंधे में उतारने में बिलकुल नहीं हिचकिचाते।

अजब : आजीविका चलाने के लिए यहां भाई-पिता लाते हैं बेटी-बहनों के लिए ग्राहक

भारत में बांछड़ा समुदाय में आजीविका चलाने का प्रमुख साधन ही वेश्यावृति है। यहां लड़कियों के जन्म पर खुशियां मनाई जाती है क्योंकि उनके लिए यही आगे चलकर घर चलाने का जरिया बन जाती हैं। इस समुदाय के पुरुष महिलाओं से वेश्यावृति कराने को जायज़ मानते हैं और पीढ़ी दर पीढ़ी,ये प्रथा चली आ रही है।

अजब : आजीविका चलाने के लिए यहां भाई-पिता लाते हैं बेटी-बहनों के लिए ग्राहक

मां-बाप के द्वारा 12 से 14 साल की होने पर लड़कियों को इस धंधे में धकेल दिया जाता है। यहां तक कि लड़कियों के भाई-पिता उनके लिए कस्टमर लेकर आते हैं। घरों में बाकायदा सिर्फ इसी के लिए एक कमरा रखा जाता है। नीमच-मंदसौर हाइवे पर चारपाई पर चमकीले कपड़ों में सजी-धजी और भड़कीला मेकअप किए हुए कई लड़कियां ग्राहकों के इंतजार में बैठी दिख जाती हैं। इनके ज्यादातर कस्टमर ट्रक ड्राइवर या दूसरे गांवों के पुरुष होते हैं। इनसे जो कमाई होती है, उसी से इन महिलाओं के घर चलते हैं।

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