ये कैसी अजीब परंपरा? मध्यप्रदेश के इस गांव की औरते पुरुषो को आते देख कर…?

रोचक : आज के समय में महिला सशक्तिकरण की बातें खूब सुनी जाती हैं .. लेकिन आज भी आधी आबादी कई बंदीशों में जकड़ी हुई हैं। खास कर ग्रामीण इलाकों में परम्पराओं की बेड़ियों में औरते इस कदर बंधी हुई हैं कि सशक्त होने की बात तो दूर है वो एक सामान्य जीवन भी नही
 
ये कैसी अजीब परंपरा? मध्यप्रदेश के इस गांव की औरते पुरुषो को आते देख कर…?

रोचक : आज के समय में महिला सशक्तिकरण की बातें खूब सुनी जाती हैं .. लेकिन आज भी आधी आबादी कई बंदीशों में जकड़ी हुई हैं। खास कर ग्रामीण इलाकों में परम्पराओं की बेड़ियों में औरते इस कदर बंधी हुई हैं कि सशक्त होने की बात तो दूर है वो एक सामान्य जीवन भी नही जी पाती हैं। आज भी इसी देश में एक ऐसा गांव भी हैं जहां महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर चलना तो क्या पुरूषों के सामने चप्पल तक नही पहन सकती हैं।

ये गांव है मध्य प्रदेश के चंबल क्षेत्र में आने वाला आमेठ गांव, जहां औरतें मर्दों के सामने चप्पल उतार कर नंगे पैर चलती हैं। लगभग 1200 की अाबादी वाले इस गांव में महिलाओं की आबादी पांच सौ के तकरीबन है। घर से निकलते ही इन्हे चप्पल पांव में ना पहनकर हाथ में लेना पड़ता है कि कहीं घर या पड़ोस का कोई पुरूष देख ना लें वहीं रास्ते में कोई मर्द मिल जाए तो उसके सामने भी नंगे पैर ही चलना पड़ता है।

ये कैसी अजीब परंपरा? मध्यप्रदेश के इस गांव की औरते पुरुषो को आते देख कर…?

यहाँ के लोग कहते है कि औरतों को पुरुषों की इज़्ज़त की ख़ातिर उनके सामने चप्पल पहन कर नहीं चलना चाहिए। गांव के बुजुर्ग कहते हैं हमारी औरते सम्मान में आज भी हमें देखकर दूर से ही चप्पल उतार लेती हैं..चाहे कभी रास्ते में मिल जाएं हैं तो वो चप्पल उतार कर दूर खड़ी हो जाती हैं। औरतें अपनी राज़ी-खुशी से ऐसा करती हैं और परम्परा निभाती हैं। हमने कोई ज़बरदस्ती नहीं की है। हालांकि गांव के कुछ युवा इसका विरोध कर रहें हैं!

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