ये हैं वो किन्नर जो एक रात की सुहागन बनने के बाद उजाड़ लेते हैं मांग

तमिलनाडु का कूवगम गांव किन्नरों का तीर्थ स्थल माना जाता है. हर साल मई के यहां कूवगम फेस्टिवल मनाया जाता है. किन्नर एक ऐसा समाज है जिसके बारे में लोग बात करना भी पसंद नहीं करते. उनसे जुड़े कई ऐसे फैक्ट्स हैं जो शायद ही किसी को पता हों. तमिलनाडु का कूवगम गांव ट्रांसजेंडर्स का
 
ये हैं वो किन्नर जो एक रात की सुहागन बनने के बाद उजाड़ लेते हैं मांग

तमिलनाडु का कूवगम गांव किन्नरों का तीर्थ स्थल माना जाता है. हर साल मई के यहां कूवगम फेस्टिवल मनाया जाता है.

किन्‍नर एक ऐसा समाज है जिसके बारे में लोग बात करना भी पसंद नहीं करते. उनसे जुड़े कई ऐसे फैक्ट्स हैं जो शायद ही किसी को पता हों. तमिलनाडु का कूवगम गांव ट्रांसजेंडर्स का तीर्थ स्थल जाता है. हर साल यहां कूवगम फेस्टिवल मनाया जाता है. यहां देश भर के ट्रांसजेंडर्स पहुंचे थे. यहां कई तरह के इवेंट होते हैं. ये त्योहार 18 दिन तक चलता है. उत्सव के दौरान ट्रांसजेंडर्स हर रात अर्जुन के पुत्र अरावन की पूजा करने मंदिर जाते हैं|

18 दिन तक चलने वाले इस त्योहार में मिस कूवगम ब्यूटी कॉन्टेस्ट होता है. इस दिन महाभारत के उस अध्‍याय का मंचन किया जाता है जब भगवान कृष्ण ने मोहिनी का रूप धारण कर अर्जुन के बेटे अरावन से शादी की थी. त्योहार के आखिरी दिन सभी किन्‍नर अरावन से एक रात के लिए शादी करते हैं. अगले दिन अरावन की मूर्ति को कूवगम में घुमाया जाता है और नष्ट कर दिया जाता है|

शादी के दिन सभी किन्‍नर अरावन के नाम का मंगलसूत्र धारण करते हैं और दुल्हन की तरह तैयार होते हैं. इस दिन जमकर नाच गाना होता है. अगले ही दिन इन्हें विधवा कर दिया जाता है. फिर मातम भी मनाया जाता है. मंगलसूत्र को हासिए से काट दिया जाता है और चूड़ियों को नारियल से तोड़ दिया जाता है|

मिस कूवगम कॉन्टेस्ट बिलकुल उसी तरह किया जाता है जैसे मिस इंडिया का कॉन्टेस्ट होता है. जीतने वाले किन्‍नर को बहुत इज्जत दी जाती है. इस त्योहार को देखने के लिए दूर-दराज से लोग आते हैं. किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच पूरे कार्यक्रम का आयोजन होता हे|

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