ये हैं भगवान श्री राम के बेटे ‘कुश के 309वे पीढ़ी’ के वंशज, ऐसी है रॉयल राजघराने की लाइफ

15 अगस्त 1947 के बाद देश को अंग्रेजों से स्वतंत्रता मिलने के साथ ही राजशाही भी समाप्त हो गई. फिर भी अनेक राज परिवार ऐसे रहे हैं जो आज भी उसी शानो-शौकत हेतु जाने जाते हैं. लोग आज भी उनको अपना राजा मानते हैं. ऐसा ही एक परिवार है जयपुर का राजघराना. हम हैं श्री
 
ये हैं भगवान श्री राम के बेटे ‘कुश के 309वे पीढ़ी’ के वंशज, ऐसी है रॉयल राजघराने की लाइफ

15 अगस्त 1947 के बाद देश को अंग्रेजों से स्वतंत्रता मिलने के साथ ही राजशाही भी समाप्त हो गई. फिर भी अनेक राज परिवार ऐसे रहे हैं जो आज भी उसी शानो-शौकत हेतु जाने जाते हैं. लोग आज भी उनको अपना राजा मानते हैं. ऐसा ही एक परिवार है जयपुर का राजघराना.

ये हैं भगवान श्री राम के बेटे ‘कुश के 309वे पीढ़ी’ के वंशज, ऐसी है रॉयल राजघराने की लाइफ

हम हैं श्री राम के पुत्र कुश के वंशज: रानी पद्मिनी

एक अंग्रेजी चैनल को दिए गए इंटरव्यू के दौरान जयपुर की महारानी पद्मिनी देवी ने कहा था कि वे श्री राम के वंशज हैं. उन्होंने बताया था कि उनका परिवार राम के बेटे कुश के परिवार के वंशज हैं. उनके पति तथा जयपुर के पूर्व महाराज भवानी सिंह कुश के 309वें वंशज थे. महाराजा मानसिंह के द्वारा 3 शादियां की गई थी, 21अगस्त 1912 को इनका जन्म हुआ था. प्रथम विवाह 1924 में 12 वर्ष की आयु में जोधपुर के महाराजा सुमेर सिंह की बहन मरुधर कंवर के साथ हुई थी.

ये हैं भगवान श्री राम के बेटे ‘कुश के 309वे पीढ़ी’ के वंशज, ऐसी है रॉयल राजघराने की लाइफ

इनका दूसरा विवाह उनकी प्रथम पत्नी की भतीजी किशोर कंवर के साथ सन 1932 में हुआ था. इसके पश्चात 1940 में उन्होंने गायत्री देवी के साथ तीसरा विवाह किया.

महाराजा सवाई मानसिंह तथा उनकी प्रथम पत्नी मरुधर कंवर के बेटे भवानी सिंह का विवाह पद्मिनी देवी के साथ हुआ था. उनकी इकलौती बेटी हैं दिया कुमारी.

दिया कुमारी का विवाह नरेंद्र सिंह के साथ हुआ. उनके दो बेटे पद्मनाभ सिंह तथा लक्ष्यराज सिंह हैं एवं एक बेटी हैं गौरवी. दिया कुमारी वर्तमान में सवाई माधोपुर सीट से बीजेपी विधायक हैं. पद्मनाभ सिंह 12 वर्ष की आयु में जयपुर रियासत संभालने लगे तो दूसरे बेटे लक्ष्यराज सिंह ने केवल 9 वर्ष की आयु में ये जिम्मेदारी संभाली.

भवानी सिंह के निधन के पश्चात पद्मनाभ सिंह का राजतिलक हुआ

ये हैं भगवान श्री राम के बेटे ‘कुश के 309वे पीढ़ी’ के वंशज, ऐसी है रॉयल राजघराने की लाइफ

महाराजा ब्रिगेडियर भवानी सिंह का कोई बेटा नहीं था. अतः उन्होंने 2002 में अपनी ही बेटी दिया कुमारी के बेटों को गोद ले लिया था. भवानी सिंह के निधन के पश्चात 2011 में उनके वारिस के तौर पर पद्मनाभ सिंह का राजतिलक किया गया एवं छोटे बेटे लक्ष्यराज 2013 में गद्दी पर विराजे.

भारत देश में रजवाड़ों को पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया गया है, किन्तु अभी भी राजघरानों में परंपरा में शामिल राजतिलक की ये रस्म राज्य का वारिसाना हक सिम्बॉलिक तौर पर ट्रांसफर किया जाता है. गायत्री देवी के पुत्र जगत सिंह के द्वारा थाईलैंड की राजकुमारी प्रियनंदना रंगसित से शादी की गई थी. देवराज तथा लालित्या उन्हीं की संतानें हैं. आगे चल कर जगत सिंह तथा प्रियनंदना के रिश्ते में खटास आ गई एवं दोनों अलग हो गए.

राजकुमारी प्रियनंदना अपने पुत्र देवराज तथा बेटी लालित्या को साथ लेकर थाईलैंड वापस लौट गईं. जगत सिंह की 1997 में मौत हो गई थी. महारानी पद्मिनी देवी अक्सर शहर में होने वाले अनेकों छोटे-बड़े कार्यक्रमों के दौरान चीफ गेस्ट बनकर पहुंचती हैं.

वहीं, उनकी पुत्री दिया कुमारी सवाई माधोपुर सीट से एमएलए हैं. वे अक्सर राजस्थान में आयोजित होने वाले कई इवेंट्स में दिखाई देती हैं. दिया कुमारी के पुत्र तथा जयपुर के राजा पद्मनाभ सिंह इंडिया की पोलो टीम के खिलाड़ी हैं. ये परिवार जयपुर में आयोजित होने वाली रॉयल पार्टियों में अक्सर देखे जाते हैं.

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