ऐसा आश्चर्यजनक पत्थर जिसे भगवान श्रीकृष्ण का रहस्यमयी पत्थर भी कहते हैं

विज्ञान चाहे कितनी ही प्रगति कर ले लेकिन कुछ पहेलियां आज भी ऐसी है जिन्हें विज्ञान आज भी नहीं सुलझा पाया है। ऐसा ही एक आश्चर्य भारत के एक कस्बे महाबलीपुरम में है। जिसको देखकर लोग आश्चर्य से मुंह में अंगुली दबा लेते है। महाबलीपुरम में कृष्णा बटन के नाम से एक विशालकाय पत्थर है
 
ऐसा आश्चर्यजनक पत्थर जिसे भगवान श्रीकृष्ण का रहस्यमयी पत्थर भी कहते हैं

विज्ञान चाहे कितनी ही प्रगति कर ले लेकिन कुछ पहेलियां आज भी ऐसी है जिन्हें विज्ञान आज भी नहीं सुलझा पाया है। ऐसा ही एक आश्चर्य भारत के एक कस्बे महाबलीपुरम में है। जिसको देखकर लोग आश्चर्य से मुंह में अंगुली दबा लेते है।

ऐसा आश्चर्यजनक पत्थर जिसे भगवान श्रीकृष्ण का रहस्यमयी पत्थर भी कहते हैं

महाबलीपुरम में कृष्णा बटन के नाम से एक विशालकाय पत्थर है जो ग्रेविटि के सिद्धान्तों के विपरीत एक छोटी सी जगह पर टिका हुआ है। इस विशाल पत्थर को भगवान श्रीकृष्ण का रहस्यमयी पत्थर भी कहा जाता है।

भगवान कृष्णा से संबंध

ऐसा आश्चर्यजनक पत्थर जिसे भगवान श्रीकृष्ण का रहस्यमयी पत्थर भी कहते हैं

यह विशाल पत्थर चेन्नई के कस्बे महाबलीपुरम में स्थित है। यह विशाल पत्थर कृष्णा बटर बॉल के नाम से प्रसिद्ध है। यह विशाल पत्थर करीब 20 फिट उॅचा और 5 मीटर चौडा है। यह माना जाता है कि यह विशाल पत्थर भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय भोजन माखन का एक टुकडा है जो स्वर्ग से गिरा है। यह विशाल पत्थर 45 डिग्री के कोण पर एक पहाडी ढलान पर टिका हुआ है और इस स्थिती में होने पर लुढक नहीं रहा यह आश्चर्य का विषय है।

वैज्ञानिक भी है हैरान

ऐसा आश्चर्यजनक पत्थर जिसे भगवान श्रीकृष्ण का रहस्यमयी पत्थर भी कहते हैं

इस पत्थर का वजन करीब 250 टन है। यह विशाल पत्थर एक पहाडी पर पिछले सैंकडों सालों से इस ढलान वाली पहाडी पर टिका हुआ है। यह विशाल पत्थर जिसे कृष्णा की बटर बॉल कहा जाता है गुरूत्वाकर्षण के सिंद्धान्तों के विपरित खडा है। हमेशा लोगों को ऐसा लगता है कि यह पत्थर लुढककर पहाडी से नीचे गिर जायेगा। लेकिन ऐसा कभी नहीं होता और यह पहाडी आज भी उसी तरह से पहाडी पर टिका हुआ है। वैज्ञानिक इस बात पर कई तरह के तर्क देते है लेकिन असल कारण क्या है इसका जवाब वे भी नहीं दे पाते है।

इस अंग्रेज ने भी की थी कोशिश 

ऐसा आश्चर्यजनक पत्थर जिसे भगवान श्रीकृष्ण का रहस्यमयी पत्थर भी कहते हैं

इस पत्थर को कई बार इस पहाडी से हटाने की कोशीश की जा चुकी है लेकिन हर कोशीश नाकाम हुयी है। किसी समय दक्षिण भारत पर पल्लव राजाओं का शासन हुआ करता था। उस समय पल्लव राजा ने भी इस पत्थर को हटाने की कोशीश की गयी। लेकिन कई कोशीशों के बाद भी इस पत्थर को हटाना तो दूर यह पत्थर हिला नहीं पाया। उसके बाद अंग्रेजों के शासन के समय में 1908 में मद्रास गर्वनर आर्थर ने भी इसको हटाने की भरपूर कोशिश की। गर्वनर आर्थर पत्थर को हटाने के लिये 7 हाथियों को लगाया लेकिन वे हाथी भी उस पत्थर को हटाना तो दूर हिला भी नहीं पाये।

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