साल में 4 बार आते हैं नवरात्र लेकिन 2 बार ही क्यों मानते है, क्या है इसके पीछे की मान्यता

इस समय देश भर में नवरात्रो के त्यौहार की धूम मची हुई है. हिन्दू समुदाय के लोग इस त्यौहार को माता के जगराते बहुत सारा उत्सव और गरबा के साथ मानते है. हिन्दू समुदाय के लोग इस नवरात्र के पवन त्यौहार पर माँ दुर्गा के सभी नौ रूपों की पूजा करते है. आपको बता दे
 
साल में 4 बार आते हैं नवरात्र लेकिन 2 बार ही क्यों मानते है, क्या है इसके पीछे की मान्यता

इस समय देश भर में नवरात्रो के त्यौहार की धूम मची हुई है. हिन्दू समुदाय के लोग इस त्यौहार को माता के जगराते बहुत सारा उत्सव और गरबा के साथ मानते है. हिन्दू समुदाय के लोग इस नवरात्र के पवन त्यौहार पर माँ दुर्गा के सभी नौ रूपों की पूजा करते है.

आपको बता दे की हिन्दू समुदाय की मान्यता के अनुसार व्रत के त्योहारों में नवरात्रो को सबसे बड़ा त्यौहार मन जाता है. ननवरात्रो के त्यौहार में माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए लोग उनकी पूजा करते है उनके लिए व्रत रखते है नवरात्र कैसे मनाये और व्रत में क्या खाये क्या न खाये ऐसे बहुत से सवाल हमारे मन में उठते है लेकिन क्या आपने ये जान ने की कोशिश की कि नवरात्र का मतलब क्या होता है. आज हम आपको बताते है कि नवरात्र साल में दो बार ही क्यों मनाई जाती है.

आइये आपको बताते है नवरात्रो से जुड़े कुछ तथ्य जो आप शायद ही जानते हो

1.नवरात्र और दुर्गा पूजा के त्यौहार को मानाने के लिए हिन्दू समुदाय दो प्रकार की धारणाये प्रचलित है. वो इस प्रकार है.

एक मान्यता के अनुसार जब भगवान् राम ने रावण को युद्ध में हारने के लिए उन्होंने इसके लिए माँ चंडी की पूजा की थी. माँ चंडी देवी भगवान् राम की पूजा से प्रसन्न हुई और भगवान् राम को विजयी होने का आर्शीवाद दिया. तभी से नवरात्र का त्यौहार मनाया जाता है और उसके बाद दशहरा का त्यौहार मनाया जाता है.

दूसरी मान्यता के अनुसार महिसासुर नाम का एक राक्षस जिसने घोर तपस्या से देवी-देवताओं को प्रसन्न किया और उनसे वरदान पाकर उनके खिलाफ ही युद्ध करने लगा. देवी देवताओ ने उस राक्षस से तंग आकर सभी देवी देवताओ ने अपने अंश से देवी दुर्गा की रचना की और सभी ने ने उनको अपने शास्त्र देकर उनको शक्तिशाली बना दिया. जिसके बाद माँ दुर्गा का महिषासुर के साथ आठ दिनों तक युद्ध चला और नौवे दिन माँ दुर्गा ने माँ दुर्गा ने महिसासुर का संहार किया. जिसके बाद पुरे देवता और मानव जाति ने दशहरा का त्यौहार मनाया.

2. आपको शायद ही पता होगा कि सल्ल में नवरात्र दो बार नहीं बल्कि चार बार आते है. इन चारो के नाम निम्नलिखित है.

1. वासांतिक नवरात्र

2. शारदीय नवरात्र

3. आषाढ़ी नवरात्र

4. माघी गुप्त नवरात्र.

इन चारों नवरात्रों में आमतौर पर हिन्दू समुदाय के लोग शारदीय नवरात्र और वासांतिक नवरात्र को ही मनाते है. ऐसा मन जाता है कि शारदीय नवरात्र सबसे ज्यादा फलदायी होती है. जो आमतौर पर सितंबर-अक्टूबर के महीने में आती है.

3. नवरात्रो में हम माँ दुर्गा के नौ रूपों कि पूजा करते है इन नौ दिनों में हम पहले दिन माँ शैलपुत्री दुसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी तीसरे दिन माँ चंद्र घंटा चौथे दिन माँ कूष्माण्डा पाचवे दिन माँ स्कंदमाता छठवे दिन कात्यायनी सातवे दिन माँ कालरात्रि आठवे दिन महागौरी और अंत में नौवे दिन माँ सिद्धिदात्री देवी कि पूजा की जाती है. और उसके अगले दिन दशहरा का त्यौहार मनाया जाता है.

4. नवरात्रो के पवन त्यौहार पर इन नौ रातो में त्रिदेवियाँ यानि माँ महालक्ष्मी, माँ सरस्वती और माँ दुर्गा के नौ रूपों की विशेष पूजा अर्चना की जाती है.

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