जानिए कैसे भगवान विष्णु के छल के कारण बचे भगवान शिव के प्राण

एक समय भस्मासुर नामक असुर ने घोर तपस्या से शिव जी को प्रसन्न किया और वरदान के रूप में माँगा कि वो जिसके भी सिर पर हाथ रख दे वो भस्म हो जाये। शिव जी ने कहा ऐसा ही होगा। इसी कारण सके इस असुर का नाम भस्मासुर पड़ा। परन्तु भगवान शिव के जीवन पर
 
जानिए कैसे भगवान विष्णु के छल के कारण बचे भगवान शिव के प्राण

एक समय भस्मासुर नामक असुर ने घोर तपस्या से शिव जी को प्रसन्न किया और वरदान के रूप में माँगा कि वो जिसके भी सिर पर हाथ रख दे वो भस्म हो जाये। शिव जी ने कहा ऐसा ही होगा। इसी कारण सके इस असुर का नाम भस्मासुर पड़ा। परन्तु भगवान शिव के जीवन पर संकट तब उत्पन्न हो गया जब भस्मासुर वरदान की पुष्टि के लिए भगवान शिव की तरफ भगा। उस असुर से बचने के लिए शिव जी विष्णु जी के पास पहुंचे और उनसे पूरी कथा बताई। तब विष्णु जी को उपाय सूझा और उन्होंने सुन्दर स्त्री का रूप धारण करके भस्मासुर को आकर्षित करने की योजना बनाई। मोहिनी के रूप को देखकर भस्मासुर आकर्षित हो गया और भगवान शिव को भूलकर मोहिनी के पीछे भागने लगा ।

तब भगवान विष्णु रूपी मोहिनी ने बड़ी चतुराई से भस्मासुर को अपने साथ नृत्य करने के लिए प्रेरित किया । कुछ ही समय मे भस्मासुर मोहिनी के साथ नृत्य करने लगा। नृत्य करते करते वो इतना मग्न हो गया कि मोहिनी की भांति ही नृत्य करने लगा और तभी मौका पाकर मोहिनी ने अपना हाथ सिर पर रखा ऐसा ही भस्मासुर ने भी किया और उसी समय भस्म हो गया । इस प्रकार भस्मासुर का वरदान ही उसकी मृत्यु का कारण बना।

इस प्रकार से विष्णु जी के छल से भगवान शिव बच पाये । ऐसा माना जाता है भस्मासुर से बचने के लिए शिवजी जिस गुफा में छिपे थे । वो जम्मू से 150 किलोमीटर दूर त्रिकुटा की पहाड़ियों पर स्थित है ।

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