ईस्टर का इतिहास, यह कब शुरू हुआ? जानिये Easter के बारें में रोचक जानकारियां

रोचक बातें: ईस्टर, ईसाई पूजन-वर्ष में सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक धार्मिक पर्व है। ईसाई धार्मिक ग्रन्थ के अनुसार, सूली पर लटकाए जाने के तीसरे दिन यीशु मरे हुओं में से पुनर्जीवित हो गए थे। इस मृतोत्थान को ईसाई ईस्टर दिवस या ईस्टर रविवार मानते हैं। ईस्टर को चालीस सप्ताहों के काल या एक चालीसे के अंत
 
ईस्टर का इतिहास, यह कब शुरू हुआ? जानिये Easter के बारें में रोचक जानकारियां

रोचक बातें: ईस्टर, ईसाई पूजन-वर्ष में सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक धार्मिक पर्व है। ईसाई धार्मिक ग्रन्थ के अनुसार, सूली पर लटकाए जाने के तीसरे दिन यीशु मरे हुओं में से पुनर्जीवित हो गए थे। इस मृतोत्थान को ईसाई ईस्टर दिवस या ईस्टर रविवार मानते हैं। ईस्टर को चालीस सप्ताहों के काल या एक चालीसे के अंत के रूप में भी देखा जाता है, इस काल को उपवास, प्रार्थना और प्रायश्चित करने के लिए माना जाता है। चालीस दिनों के आखिरी हफ्ते को शुद्ध हफ्ता माना जाता है। गुड फ्राइडे का दिन यीशु को सूली पर चढ़ाने वाले दिन और उनकी मृत्यु के दिन को श्रद्धांजलि देता है। निम्न लिखित ईस्टर 50 दिन का पूरा दौर है, जिसे ईस्टरटाइड भी कहते हैं और जिसका अंत पेंटेकोस्ट रविवार को होता है। Play Quiz::चार सवालों के जवाब देकर जीते 400 रुपये paytm कैश

ईस्टर का इतिहास,  यह कब शुरू हुआ?

ईस्टर का इतिहास, यह कब शुरू हुआ? जानिये Easter के बारें में रोचक जानकारियां

2 सदी के आखिर में लोगों ने बहस की कि क्या धार्मिक परंपरा और जश्न को पासओवर पर या आने वाले रविवार को मनाना चाहिए। उन लोगो ने उसे रविवार को मनाने का फैसला किया और तब से यह रविवार को ही मनाया जाता है।

ईस्टर के अंडे, 400 AD

कई लोग कहते हैं कि यह छोटे ख़ुशी के गोले मध्यकालीन यूरोप से आए थे। लोगों को उपवास के समय अंडे खाने कि इजाज़त नहीं थी। तो उस समय जो भी अंडे होते थे, उन्हें तब तक रखा जाता था जब तक उपवास पूरा न हो जाये। इसी तरह ढेर अंडे इकट्ठे हो जाते थे और लोग उन्हें ईस्टर पर खाते थे।

ईस्टर बन्नी, 13वी शताब्दी

ईस्टर का इतिहास, यह कब शुरू हुआ? जानिये Easter के बारें में रोचक जानकारियां

लोग कहते हैं कि ईस्टर बन्नी 13 शताब्दी से साथ है। इस समय कई लोग वसंत और उपजाऊ की देवी इओस्तरा की पूजा करते है। विश्वास हैं की ईओस्तरा खरगोश का प्रतीकात्मक थी और इसी तरह इओस्तरा से ईस्टर बन्नी आया।

अण्डों को सजाना, 19वी शताब्दी

अण्डों को सजाना तब शुरू हुआ जब राजसी लोगों ने अंडे पर सोना अलंकृत करके एक दूसरे को तोहफे के रूप में देना शुरू किया।

ईस्टर की मिठाई, 1930

1930 में लोगों ने कहा की जेली बीन्स ईस्टर अण्डों की तरह दिखती है और इसी लिए उन्होंने ज़्यादा जेली बीन बनाना शुरू कर दिया। आज हर साल ईस्टर के लिए 16 बिलियन जेली बीन बनायीं जाती है।

यह कब मनाया जाता है?

वैसे तो यह साल पर आधारित होता है लेकिन ईस्टर को हमेशा 21 मार्च के बाद पूर्णमाशी के पहले रविवार को मनाया जाता है।

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