क्या आपने कोई ऐसा मंदिर देखा है जहां दीपक घी, तेल से नहीं बल्कि इस चीज से जलाया जाता है?

कालीसिंध नदी के तट पर एक माँ का मंदिर है जहाँ दीपक तेल से नहीं जल से जलाया जाता है। अपनी अनूठी विशेषता के कारण यहां भक्तों की भीड़ लगी रहती है। इस मंदिर में दीया जलाने के लिए आपको घी या तेल की जरूरत नहीं होती है।दीपक कई सालों से पानी में जल रहा
 
क्या आपने कोई ऐसा मंदिर देखा है जहां दीपक घी, तेल से नहीं बल्कि इस चीज से जलाया जाता है?

कालीसिंध नदी के तट पर एक माँ का मंदिर है जहाँ दीपक तेल से नहीं जल से जलाया जाता है। अपनी अनूठी विशेषता के कारण यहां भक्तों की भीड़ लगी रहती है। इस मंदिर में दीया जलाने के लिए आपको घी या तेल की जरूरत नहीं होती है।दीपक कई सालों से पानी में जल रहा है।

क्या आपने कोई ऐसा मंदिर देखा है जहां दीपक घी, तेल से नहीं बल्कि इस चीज से जलाया जाता है?

इस मंदिर को गड़ियाघाटवाली माता के नाम से भी जाना जाता है। पुजारी ने कहा कि दीपक हमेशा की तरह तेल से जल रहा था लेकिन एक बार सपने में उसने अपनी मां को देखा तो उसने उसे पानी से दीया जलाने के लिए कहा और तब से दीपक उसी पानी से जल रहा है।

क्या आपने कोई ऐसा मंदिर देखा है जहां दीपक घी, तेल से नहीं बल्कि इस चीज से जलाया जाता है?

कालीसिंध नदी का जल इस दिन प्रकाश में लाया जाता है। इस मंदिर में केवल मानसून में ही दीपक नहीं जलाया जाता है क्योंकि कालीसिंध नदी का जल स्तर इतना बढ़ जाता है कि यह मंदिर पानी में डूब जाता है। फिर शरद नवरात्रि के पहले दिन ज्योति जलाई जाती है। जो साल भर चलती है। यह मंदिर अपनी प्रसिद्धि के लिए बहुत प्रसिद्ध है।

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