बचपन से थी बाल खाने की आदत 10 साल बाद पेट से निकला चार किलो बालों का गुच्छा

फर्रुखाबाद (Uttar Pradesh)। लोहिया अस्पताल में एक अजब-गजब केस सामने आया। पेट दर्द की शिकायत पर दवा लेने आई किशोरी का डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर दिया। उसके पेट से चार किलो बालों का गुच्छा निकाला। डॉक्टरों का कहना था कि समय रहते ऑपरेशन होने से किशोरी की जान बच गई। वहीं, किशोरी के पिता ने
 
बचपन से थी बाल खाने की आदत 10 साल बाद पेट से निकला चार किलो बालों का गुच्छा

फर्रुखाबाद (Uttar Pradesh)। लोहिया अस्पताल में एक अजब-गजब केस सामने आया। पेट दर्द की शिकायत पर दवा लेने आई किशोरी का डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर दिया। उसके पेट से चार किलो बालों का गुच्छा निकाला। डॉक्टरों का कहना था कि समय रहते ऑपरेशन होने से किशोरी की जान बच गई। वहीं, किशोरी के पिता ने बताया कि वह पांच साल की उम्र से ही खुद के बाल खाती थी, लेकिन 15 साल की उम्र होने पर उसने पेट दर्द की शिकायत करनी शुरू कर दी, जिसके बाद वे उसे डॉक्टर के पास ले गए।

बचपन से थी बाल खाने की आदत 10 साल बाद पेट से निकला चार किलो बालों का गुच्छा

इस तरह हुई जानकारी
पांच साल की उम्र कायमगंज तहसील के गांव मई रसीदपुर निवासी सुनील कुमार की बेटी शिवानी (15) को कुछ दिनों से पेट दर्द की शिकायत थी। बीते दिनों सुनील कुमार ने बेटी को लोहिया अस्पताल में डॉ. इमरान अली को दिखाया।

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पेट से निकला चार किलो बालों का गुच्छा
डॉ. इमरान अली ने शिवानी की जांज करवाईं। रिपोर्ट देख डॉक्टर शॉक्ड थे। उनको यकीन नहीं हो रहा था कि इतना ज्यादा बालों का गुच्छा पेट में पड़ा हुआ है। इसके बाद सोमवार को सर्जन डॉ. इमरान अली ने शिवानी का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के दौरान उसके पेट से चार किलो बालों का गुच्छा निकला।

बचपन से थी बाल खाने की आदत
घरवालों ने डॉक्टर को बताया कि शिवानी को पांच साल की उम्र से बालों को खाने की लत लग गई थी। वहीं, डॉक्टर का कहना था कि बालों के खाने के चलते ही उसके पेट में बाल एकत्र होते गए। शिवानी की हालत अब ठीक है।

इस कारण बच्चे खाते हैं बाल
सर्जन डॉ. इमरान अली ने बताया कि ऐसा बच्चे तब करते हैं, जब उन्हें इग्नोर किया जाता है या वो खुद को बहुत अकेला महसूस करते हैं। बाल हमारे पेट में पचते नहीं हैं। थोड़े बहुत छोटे बाल हमारे मल के साथ बाहर भी निकल सकते हैं, लेकिन बड़े बाल बाहर नहीं आते। जैसे-जैसे बालों के इस गोले का साइज बढ़ता है, पेट दर्द और बदहजमी जैसी दिक्कतें पैदा होने लगती हैं।

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